
भोपाल। हम थियेटर ग्रुप की और से सोमवार को नाटक 'ययाति' का मंचन किया गया। गिरीश कारनाड लिखित इस नाटक निर्देशन बालेन्द्र सिंह ने किया। नाटक में दिखाया गया कि वैवाहिक जीवन में सुख बनाए रखने के लिए पति-पत्नी को एक-दूसरे का विश्वास नहीं तोड़ना चाहिए। यही इस नाटक का संदेश है। ययाति और देवयानी की कथा पति-पत्नी को सम्मान और विश्वास बनाए रखना चाहिए, तभी वैवाहिक जीवन सुखी रहता है। राजा ययाति का विवाह दैत्य गुरु शुक्राचार्य की बेटी देवयानी से हुआ था, ययाती के प्रसंग से समझ सकते हैं, कैसे बिगड़ता है पति-पत्नी का रिश्ता।
ययाति शुक्राचार्य को दिया हुआ वचन भूल चुके थे
श्रीमद्भागवत में राजा ययाति की कथा बताई गई है। महाभारत काल में राजा ययाति का विवाह दैत्य गुरु शुक्राचार्य की बेटी देवयानी से हुआ था। विवाह के बाद एक शर्त के तहत दैत्यों की राजकुमारी शर्मिष्ठा भी देवयानी के साथ दासी के रूप में ययाति के यहां आई थी। शुक्राचार्य ने ययाति से वचन लिया था कि वो कभी भी देवयानी के अलावा किसी और स्त्री से संबंध नहीं रखेगा। ययाति ने भी शुक्राचार्य को इस बात का वचन दिया था। विवाह के कुछ समय बाद देवयानी और ययाति के घनिष्ट प्रेम को देखकर शर्मिष्ठा को देवयानी से ईष्र्या करने लगी। शर्मिष्ठा राजकुमारी थी, लेकिन एक दासी का जीवन व्यतीत कर रही थी। उसने सोचा कि वह राजा ययाति को अपने सुंदर रूप से आकर्षित करके खुद भी जीवन के सभी सुख प्राप्त करेगी। अपनी योजना के अनुसार शर्मिष्ठा ने ययाति को आकर्षित कर लिया। ययाति शुक्राचार्य को दिया हुआ वचन भूल चुके थे और उन्होंने शर्मिष्ठा से संबंध बना लिए।
एक-दूसरे का विश्वास नहीं तोड़ना चाहिए
देवयानी को जब ये बात पता चली तो देवयानी ने शुक्राचार्य को पूरी बात बता दी और वह अपने पिता शुक्राचार्य के पास आ गई। ये बात सुनकर दैत्य गुरु शुक्राचार्य ने ययाति को शाप दे दिया कि वह युवा अवस्था में ही वृद्ध हो जाएगा। इस शाप से ययाति वृद्ध हो गए। इसके बाद ययाति ने शुक्राचार्य से क्षमा मांगी। दैत्य गुरु ने ययाति को शाप से मुक्ति का तरीका तो बता दिया, लेकिन राजा के वैवाहिक जीवन से सुख, विश्वास और सम्मान खत्म हो चुका था। वैवाहिक जीवन में सुख बनाए रखने के लिए पति-पत्नी को एक-दूसरे का विश्वास नहीं तोड़ना चाहिए। यही इस नाटक का संदेश है।
Published on:
02 May 2022 10:28 pm
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