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शादी के लिए धर्म बदलनेवालों और दुष्कर्मियों के लिए क्या कहता है इस्लाम, मुस्लिम धर्मगुरु का बड़ा बयान

Islam- मध्यप्रदेश में लव जेहाद के बढ़ते मामलों से जहां बहुसंख्यक हिंदू समाज में आक्रोश पनप रहा है वहीं कुछ लोग इसके माध्यम से मुस्लिमों के प्रति नफरत फैलाने का काम भी कर रहे हैं।

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Naib Shahar Qazi Maulana Ali Qadar's big statement on Islam

Love jihad in Islam

Islam- मध्यप्रदेश में लव जेहाद के बढ़ते मामलों से जहां बहुसंख्यक हिंदू समाज में आक्रोश पनप रहा है वहीं कुछ लोग इसके माध्यम से मुस्लिमों के प्रति नफरत फैलाने का काम भी कर रहे हैं। इधर लव जिहाद के आरोपियों के सवाब का काम करने जैसे बयानों से यह आग और भड़क रही है। ऐसे माहौल में भोपाल में मुस्लिम मंच आगे आया। मंच के तत्वावधान में "इस्लाम में बलात्कार: सज़ा या सवाब?" विषय पर प्रेस कॉन्फ्रेंस आयोजित की गई। यहां मुस्लिम धर्मगुरु, सामाजिक संगठनों के प्रतिनिधियों, कानूनी विशेषज्ञों ने एक स्वर में कथित लव जेहाद की आलोचना की। जागरूक मुस्लिमों ने कहा कि इस्लाम की शिक्षाओं को गलत संदर्भों में प्रस्तुत किया जा रहा है। दुष्कर्मियों को सख्त सजा देने की भी मांग की गई।

इस्लाम को दुष्कर्म जैसे जघन्य अपराध से जोड़ने के प्रयास का खंडन करने और कुरान तथा हदीस की उचित व्याख्या कर सच्चाई सामने लाने के उद्देश्य से मुस्लिम मंच ने यह कार्यक्रम आयोजित किया। जहांगीराबाद के इंडियन कॉफी हाउस में
वक्ताओं ने जेहाद का सही मतलब बताते हुए कहा यह जंग नहीं है बल्कि अच्छाई के लिए संघर्ष को जेहाद कहा जाता है।

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प्रेस कॉन्फ्रेंस में नायब शहर काजी मौलाना अली क़दर मुखर रहे। उन्होंने कहा कि जेहाद का मतलब केवल जंग नहीं है बल्कि यह खुद की बुराइयों, सामाजिक बुराइयों और अन्याय के खिलाफ संघर्ष करने का नाम है। ‘लव जिहाद’ और ‘लैंड जिहाद’ के नाम पर समाज में ज़हर घोलने की कोशिश की जा रही है जबकि इन शब्दों का इस्लाम से कोई वास्ता नहीं है। कुरान और हदीस में इन शब्दों का जिक्र ही नहीं है।

लड़की से शादी करने के लिए धर्म बदलना इस्लाम में स्वीकार्य ही नहीं

नायब शहर काजी ने धर्म परिवर्तन पर भी हकीकत बयां की। उन्होंने बताया कि सिर्फ किसी लड़की से शादी करने के लिए धर्म बदलना इस्लाम में स्वीकार्य ही नहीं है। इसके लिए उन्होंने कुरान की आयत का भी हवाला दिया। उन्होंने बताया कि अल्लाह के नबी ने फरमाया "अगर कोई हिजरत भी किसी दुनियावी लाभ के लिए करता है, तो उसका अमल कबूल नहीं किया जाएगा। मौलाना अली कदर ने कहा कि इस्लाम को अपनाने की एकमात्र शर्त है सच्ची नीयत और ईमानदारी।

शरीअत में दुष्कर्म की कड़ी सजा बताई गई है

अधिवक्ता आबिद मोहम्मद खान ने कहा कि शरीअत में दुष्कर्म की कड़ी सजा बताई गई है। ऐसे अपराधी को इस्लाम का प्रतिनिधि नहीं समझा जाना चाहिए। प्रेस कॉन्फ्रेंस के संयोजक, ऑल इंडिया मुस्लिम त्योहार कमेटी के अध्यक्ष दानिश खान ने कहा कि समाज में फैलाई जा रही गलतफहमियों को तथ्यों से दूर करने के उद्देश्य से यह संवाद आयोजित किया गया।

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