
भोपालः 25 मई से नाैतपा की शुरुआत हो गई है। यहां गर्मी ने तीखे तेवर सुबह से ही दिखाने शुरु कर दुये हैं। एक दिन पहले ही जहां रात का तापमान 30.4 डिग्री पर पहुंच गया। मौसम विभाग के मुताबिक, शुक्रवार की रात इस सीजन की सबसे गर्म रात गुजरी। मौसम विभाग के अनुसार, रात के तापमान में अचानक 3.8 डिग्री की बढ़ोतरी हुई और तापमान सामान्य से 4 डिग्री ज्यादा दर्ज किया गया। हालांकि, इससे पूर्व दिन के पारे में 0.9 डिग्री की गिरावट दर्ज की गई। मौसम विभाग का अनुमान है कि, मध्य प्रदेश के मौसम में हो रहे इस बदलाव को देखते हुए नौतपे के आगामी दिनो में गर्मी यहां अपना रोद्र रूप दिखा सकती है। ऐसी स्थिति में सूरज के तीखे तेवरों से कैंसे बचें, आइये जानें।
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, सूर्य के रोहिणी नक्षत्र में प्रवेश करने के साथ ही, नौतपे की शुरुआत होती है। नौतपा के दिनों में गर्मी के 9 दिनों के भीतर अपने चरम पर पड़ती है। 25 मई को 10.33 मिनट पर सूर्य के रोहिणी नक्षत्र में प्रवेश करेगा, जो 3 जून तक इसी नक्षत्र में रहेगा। इन 9 दिनों के भीतर सीजन की सबसे तेज गर्मी पड़ने की मान्यताएं रहती है। हालांकि, तेज गर्मी ही पड़े ये भी संभव नहीं है, नौतपे के दिनों में पानी गिरने के कारण तापमान में गिरावट आ जाती है। हालांकि, ऐसा माना जाता है कि, नौतपा जितना ज्यादा तपेगा उतनी ही अच्छी बारिश होती है। नौतपा के दिनों में गर्मी काफी तेज पड़ती है। क्योंकि इन 9 दिनों में सूर्य पृथ्वी के सबसे करीब रहता है, जिसके कारण गरमी काफी तेज पड़ती है।
ज्योतिषाचार्य के अनुसार
महाकाल की नगरी उज्जैन के प्रसिद्ध ज्योतिषाचार्य पं. श्यामनारायण व्यास के मुताबिक, जिस समय सूर्य रोहिणी नक्षत्र प्रदेश करता है तो उस समय चंद्रमा नौ नक्षत्रों में भ्रमण करता हैं। इसका यही मुख्य कारण है कि इसे नौतपा कहा जाता है। रोहिणी के दौरान अगर बारिश हो जाती है तो इसे रोहिणी नक्षत्र का गलना भी कहा जाता है। माना जाता है कि यदि रोहिणी नक्षत्र में बारिश हो जाती है तो आने वाले बारिश के मौसम में बारिश बहुत कम होने की समंभावना हो जाती है। इसके साथ ही ऐस बात और है कि इस समय तेज गर्मी रहने पर बारिश के अच्छे योग भी बन सकते हैं।
इस तरह रखें स्वास्थ का ध्यान
वैसे तो हमें कोशिश करना चाहिए कि, नौतपा के इन भीषण गर्मी के दिनों में सूरज के संपर्क में आने से बचना चाहिए। क्योंकि, इससे आपको कई बीमारियां हो सकती है। नौतपा के ताप से बचने के लिए आपको अपने स्वास्थ्य का अधिक ध्यान रखने की जरूरत होती है। इन दिनों में सिर्फ ग्लूकोज युक्त पानी ही पियें। जितना हो सके तो धूप में निकलने से बचें। बिल्कुल हल्का भोजन करें और ज्यादा संभव हो पानी पियें। हालांकि, बाहर तेज धूप से घर लौटते समय एक दम से पानी पीने से बचें। पूके समय कॉटन के कपड़े ही पहनें ये अन्य कपड़ों के मुकाबले शरीर का पसीना सोखने में अधिक सक्षम होते हैं।
रोहिणी नक्षत्र पर सूर्य का प्रभाव
माना जाता है कि रोहिणी नक्षत्र का मुख्त रूप से अधिपति ग्रह चंद्रमा ही होता है। वहीं दूसरी ओर सूर्य तेज और प्रताप का प्रतीक माना जाता है। जबकि चंद्रमा शीतलता का प्रतीक माना जाता है तो वहीं सूर्य जब चांद के रोहिणी नक्षत्र में प्रवेश करता है। तो सूर्य इस नक्षत्र को अपने प्रभाव में ले लेता है जिसका रोहिणी नक्षत्र पर बहुत गहरा प्रभाव पड़ता है जिसके कारण तापमान बहुत अधिक बढ़ जाता है। सूर्य के रोहिणी नक्षत्र में प्रवेश होने के दौरान जो ताप बढ़ जाता है। उसके के कारण पृथ्वी पर आंधी, तूफान और महातूफान आने की सम्भावना बढ़ जाती है।
Published on:
25 May 2019 09:56 am
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