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विक्रमादित्य के समय का है ये मंदिर, उल्टे पांव परिक्रमा से पूरी होती है मुराद

मंदिर का इतिहास उज्जैन के शासक विक्रमादित्य से जुड़ा हुआ है। बताया जाता है कि विक्रमादित्य एक बार एक बालक को छुड़ाने काशी गए थे।
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Anwar Khan

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Updated: 17 Jan 2017, 10:38 AM IST

devi temple

devi temple

भोपाल। मध्यप्रदेश की राजधानी भोपाल की एक तहसील बैरसिया में एक देवी मंदिर है। मां हरसिद्धि का मंदिर। यहां इन दिनों भक्तों की काफी भीड़ है। दूर-दूर से मुराद लेकर आने वाले भक्त मां हरसिद्धि की उल्टे फेरे लगाकर परिक्रमा करते हैं। उल्टे फेरे लगाने से मातारानी भक्तों की हर मनोकामना पूरी करती हैं। मन्नत पूरी होने पर यहां आकर भक्त सीधी परिक्रमा लगाकर आशीर्वाद लेते हैं। हर साल चैत्र नवरात्र एवं शारदीय नवरात्र के दौरान देश-प्रदेश से आने वाले लाखों श्रद्धालु मां के चरणों में शीश झुकाते हैं।

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...और तरावली में हो गया सवेरा
मंदिर का इतिहास उज्जैन के शासक विक्रमादित्य से जुड़ा हुआ है। बताया जाता है कि विक्रमादित्य एक बार एक बालक को छुड़ाने काशी गए थे। वहां काशी नरेश से बालक के बदले सेवा का आग्रह किया। काशी नरेश सुबह मां की भक्ति करते थे, और मां वरदान देती थी। एक दिन विक्रमादित्य ने पूजा की। वरदान में उन्होंने उज्जैन चलने को कहा। मां ने दो शर्तें रखीं। पहली चरण यहीं रहेंगे। दूसरी जहां सवेरा होगा, वहीं वह रुक जाएंगी। सुबह तरावली स्थित जंगल में हो गई और मां यहां विराजमान हो गईं।




बरसों से जल रहा धूना
महंत गुलाब गिरि ने बताया कि यहां जब से मां हरसिद्धि विराजमान हुई हैं, तब से धूना जलाया जा रहा है। यह कभी नहीं बुझा। इस धूने से निकली हुई अग्नि को खप्पर में रखकर मां की आरती की जाती है। उन्होंने बताया कि विक्रमादित्य ने 12 वर्ष तक यहां तपस्या की। बाद मां ने शीश के साथ चलने की बात कही, तब से मां हरसिद्धि के चरण की काशी में, धड़ तरावली और शीश की उज्जैन में पूजा की जाती है।