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हिंदू नव वर्ष 2025 का राजा सूर्य, इस बार भयंकर गर्मी, जल संकट भी

Hindu Navvarsh or Navsamvatsar: हिंदू नववर्ष संवत् 2082 का शुभारंभ 30 मार्च से , इसे सिद्धार्थ संवत्सर के नाम से जाना जाएगा, सूर्य होगा राजा

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Hindu Navvarsh 2025

Hindu Navvarsh 2025

Hindu Navvarsh or Navsamvatsar: हिंदू नववर्ष संवत् 2082 का शुभारंभ 30 मार्च से होगा। इसे सिद्धार्थ संवत्सर के नाम से जाना जाएगा। इसमें सूर्य की प्रधानता रहेगी। अर्थव्यवस्था, राजनीति, समाज, पर्यावरण पर अहम प्रभाव पड़ेगा। उज्जैन के ज्योतिषाचार्य पं. अमर डब्बावाला ने बताया, हिंदू पंचांग में 60 संवत्सरों का चक्र हैै। यह 53वां है। इस वर्ष चैत्र शुक्ल प्रतिपदा रविवार को है, इसलिए सूर्य को वर्ष का राजा माना है। यानी, देश में राजनीतिक निर्णयों का केंद्र दिल्ली होगी।

छह ग्रहों का योग

ज्योतिष मठ संस्थान भोपाल के पंचागकार पं. विनोद गौतम ने बताया, कालयुक्त और सिद्धार्थ नाम का संवत्सर होगा। फल सिद्धार्थ के अनुसार रहेगा, पूजन में कालयुक्त उच्चारण होगा। 30 मार्च को मीन राशि में सूर्य, बुध, शुक्र, शनि, राहु, चंद्र का योग है, जो संघर्ष कराता है। वर्ष प्रवेश कुंडली में 6 स्थान पाप ग्रह और चार शुभ ग्रहों के हैं। अत: परेशानी होगी। सिद्धार्थ ज्ञान वैराग्य में सहायक है।

प्रमुख ग्रहों का प्रभाव

सूर्य (राजा) : प्रशासन में कठोरता, राजनीतिक स्थिरता, अधिक गर्मी और प्राकृतिक परिवर्तन।

सूर्य (मंत्री) : साइबर अपराध बढ़ सकते हैं, लेकिन प्रशासनिक क्षमता में सुधार होगा।

बुध (सस्येश): अच्छी वर्षा होगी, जिससे कृषि और अर्थव्यवस्था में वृद्धि होगी।

चंद्र (धान्येश) : भारत की निर्यात नीति को लाभ, कृषि उत्पादन में संतुलन।

शुक्र : धर्म और आध्यात्मिकता में रुचि बढ़ेगी, मंदिरों में भक्तों की भीड़ बढ़ेगी।

बुध : वनौषधि और समुद्री वस्तुओं के दाम बढ़ेंगे, धातुओं के मूल्य में उतार-चढ़ाव रहेगा

शनि : कुछ क्षेत्रों में अतिवृष्टि तो कुछ में सूखा रहेगा, अज्ञात संक्रामक रोग बढ़ सकते हैं।

मंगल : शेयर बाजार में उतार-चढ़ाव रहेगा, विदेशी मुद्रा भंडार प्रभावित हो सकता है।

शनि (राजनीतिक प्रभाव) : युद्धप्रिय राष्ट्रों में अस्थिरता बढ़ेगी, वहीं शांतिपूर्ण देशों के बीच कूटनीतिक समझौते होंगे।

वैज्ञानिक अविष्कार बढ़ेंगे

भोपाल के पं. विष्णु राजौरिया ने बताया, वर्ष में सूर्य का प्रभाव अधिक रहेगा। इससे शिक्षा और विज्ञान के क्षेत्र में प्रगति होगी। वैज्ञानिक अविष्कार बढ़ेंगे। गर्मी की अधिकता रहेगी, रोहिणी का वास संधि में होने से खंडवृष्टि होगी लेकिन सिद्धार्थी संवत्सर में अन्न जल से पृथ्वी प्रसन्न रहती है। ऐसे में फसलें अच्छी होंगी। फलेश शनि होने से फलों की पैदावार प्रभावित होगी।

राजनीतिक दृढ़ता

राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री की भूमिका सूर्य के समान प्रभावशाली होगी। शासन में दृढ़ता और अनुशासन देखने को मिलेगा।

सूर्य प्रधानता के कारण स्वास्थ्य पर प्रभाव होगा

स्वास्थ्य प्रभाव: जलजनित और त्वचा संबंधी रोग बढ़ेंगे।

आर्थिक संतुलन

महंगाई कुछ हद तक नियंत्रित रहेगी। कृषि उत्पादन अच्छा रहेगा, किसानों को लाभ मिलेगा।

मौसम का असर

ज्यादा गर्मी पड़ेगी, जिससे जल संकट और सूखे की स्थिति बन सकती है।

प्रशासनिक सुधार

कठोरता आएगी, न्यायिक और प्रशासनिक नीतियों में बदलाव संभव।

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