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MP छात्रों के अवसर बढ़े , एमबीबीएस और डेंटल के बेहतर कॉलेजों में अब मिलेगा प्रवेश

नीट की दोबारा काउंसलिंग से मध्यप्रदेश के मूल निवासी सैंकेड़ों छात्रों के अवसर अब बढ़ गए हैं।

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NEET Counselling

भोपाल। दूसरे प्रदेशों के छात्रों के एडमिशन निरस्त होने और उनके इस प्रक्रिया में दोबारा भाग नहीं ले पाने के कारण अब प्रदेश के छात्रों को एमबीबीएस और डेंटल के बेहतर कॉलेज मिल सकेंगे।

बुधवार रात 12 बजे से मप्र के मूल निवासी छात्रों के लिए चिकित्सा शिक्षा विभाग ने च्वाइस फिलिंग शुरू भी कर दी है। छात्र ऑनलाइन अपने पसंदीदा कॉलेज को चुन सकते हैं।

मंगलवार को सुप्रीम कोर्ट ने मप्र के कॉलेजों में मूल निवासी छात्रों को तरजीह देने के लिए अन्य राज्यों के छात्रों के प्रवेश को गलत करार देते हुए पूर्व में हुई नीट काउंसिलिंग की पूरी प्रक्रिया को ही निरस्त कर दिया था। इसके अलावा प्रदेश शासन को फटकार लगाते हुए 10 दिनों के भीतर दोबारा नीट काउंसिलिंग की पूरी प्रक्रिया कंपलीट करने की बात कही।

कोर्ट के इस आदेश से प्रदेश की 2327 मेडिकल सीटों पर मूल निवासी छात्रों को फायदा मिलेगा। बाहर के छात्रों के साथ प्रतिस्पर्धा होने से इन छात्रों को मेडिकल कॉलेजों में या तो प्रवेश नहीं मिला था या प्राइवेट कॉलेज नसीब हुआ था। दोबारा काउंसलिंग की प्रक्रिया से बाहर हुए छात्रों की फीस वापस की जाएगी। वहीं मप्र के मूलनिवासी छात्रों का दूसरी काउंसिलिंग में कॉलेज बदलता है तो उनकी फीस संबंधित कॉलेज में ट्रांसफर हो जाएगी। यदि कॉलेज वही रहता है और कोर्स (डेंटल से एमबीबीएस) बदलता है तो उसके फीस डिफरेंस की राशि चुकाना होगी।

फैक्ट फाइल

प्रदेश में सरकारी मेडिकल कॉलेज - 6

प्रदेश में सरकारी डेंटल कॉलेज - 1

प्रदेश में प्राइवेट मेडिकल कॉलेज - 7

प्रदेश में प्राइवेट डेंटल मेडिकल कॉलेज- 14

प्रदेश में कुल एमबीबीएस की सीटें - 1652

डेंटल कॉलेजों में कुल सीटें - 1370

मूलनिवासी खोजने कहकर काउंसिलिंग रोक दी:
हाईकोर्ट ने 24 अगस्त में अपने आदेश में कहा था कि डायरेक्टर मेडिकल एजुकेशन छात्रों के नीट के भरे हुए फार्म में ये देखें कि वे किस राज्य के निवासी हैं, वहां से वे पकड़ में आ सकते हैं। इसके लिए सरकार ने घबराकर तीसरे दौर की काउंसिलिंग ही रोक दी और सुप्रीम कोर्ट में इस आदेश को चेलेंज करने प्लान बना लिया। सुप्रीम कोर्ट में सरकार की याचिका खारिज हुई और फायदा प्रदेश के मूल निवासी छात्रों को मिला।

मेडिकल और डेंटल कॉलेजों में काउंसिलिंग के लिए बुधवार रात 12 बजे से च्वाईस फिलिंग शुरू हो गई है। उसी कॉलेज में एडमिशन पर फीस एडजस्ट हो जाएगी। यदि छात्र अन्य कॉलेज लेते हैं तो फीस वापस होगी।
- डॉ. शशि गांधी, ज्वाइंट डायरेक्टर, चिकित्सा शिक्षा विभाग

सुप्रीम कोर्ट में बहस के दौरान जज ने पूछा था कि बताएं कितने छात्र बाहर के थे। उस दौरान मैंने सरकारी कॉलेजों में 200 और प्राइवेट कॉलेजों में 480 बाहर के छात्रों के प्रवेश का तथ्यात्मक आंकड़ा दिया था। सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद अब मप्र के इतने ही मूल निवासी छात्रों को फायदा मिल सकेगा।
- आदित्य संघी, वरिष्ठ एडवोकेट

इधर, आज से एडमिशन शुरू :-
सरकारी और निजी मेडिकल व डेंटल कॉलेजों में प्रवेश के लिए की जा रही काउंसलिंग के पहले चरण में च्वाइस फिलिंग और सीट लॉकिंग की प्रक्रिया पूरी हो चुकी है। कॉलेजों में उपलब्ध 3151 सीटों के लिए 11191 उम्मीदवारों ने आवेदन किए हैं। सीट अलॉटमेंट शनिवार को किया जाएगा। इसके साथ ही कॉलेजों में प्रवेश प्रक्रिया शुरू हो जाएगी। पहले चरण की काउंसलिंग में सिर्फ मप्र के मूल निवासियों को सीट अलॉट की जाएगी। दूसरे राउंड में खाली सीटों पर अन्य राज्यों के छात्रों को मौका मिलेगा।

चिकित्सा शिक्षा संचालनालय के अनुसार स्टेट कोटे की पहले हुई काउंसलिंग से प्रवेश ले चुके अभ्यर्थी, जिनके मूल दस्तावेज किसी संस्था में जमा हैं, उन्हें अपना वर्तमान अलॉटमेंट लेटर और संबंधित कॉलेज का दस्तावेज जमा होने का प्रमाण-पत्र पेश करना जरूरी है।

जिन्हें पहली बार सीट अलॉट हुई है, उन्हें मूल दस्तावेज जमा करना होगा। कोई अभ्यर्थी विशेष कारण से ऑनलाइन या डिमांड ड्राफ्ट से फीस जमा नहीं कर सकेंगे तो उन्हें प्रवेश के लिए मल्टीसिटी चेक इस घोषणा के साथ जमा करना होगा कि अगले कार्य दिवस में ड्राफ्ट जमा करा देंगे। काउंसलिंग में किसी कॉलेज में कोई गड़बड़ी नहीं हो इसके लिए विभाग ने कलेक्टर्स को निगरानी के निर्देश दिए हैं।

हाईकोर्ट में याचिका खारिज :
वहीं सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद जिन कैंडीडेट्स का प्रवेश निरस्त हुआ है, उनमें से कुछ ने शुक्रवार को जबलपुर हाईकोर्ट में याचिका लगाई थी, लेकिन कोर्ट ने इसे खारिज कर दिया। डीएमई ने 313 ऐसे छात्रों को बाहर किया है, जो डबल डोमिसाइल के चलते प्रवेश लेने में सफल हुए थे।

भोपाल से कॉलेज में ले सकेंगे प्रवेश
अधिकारियों के अनुसार इस बार काउंसलिंग में संबंधित कॉलेज में जाने का बंधन हटा दिया है। यदि भोपाल के किसी कैंडिडेट को ग्वालियर का कॉलेज अलॉट हुआ है तो वह भोपाल से अपना प्रवेश पुख्ता कर सकता है। उसे प्रशासन अकादमी में ग्वालियर के संबंधित कॉलेज के प्रतिनिधियों से मिलकर प्रवेश प्रक्रिया को पूरी करना होगा।