
roads
भोपाल. आपको ये जानकर हैरत होगी कि शहर में अलग-अलग एजेंसियों के प्रोजेक्ट्स की खुदाई में बीते दो से तीन सालों में 1200 किमी से अधिक लंबाई की सडक़ें खोदी गई, लेकिन रेस्टोरेशन 40 फीसदी का ही हुआ है।
ये भी इतना खराब हुआ है कि ट्रैफिक दबाव से सडक़ से अलग नजर आता है। ठेका एजेंसियों ने खुदाई के लिए संबंधित एजेंसियों को राशि जमा कराई और संबंधित सडक़ की सरकारी एजेंसी ने रेस्टोरेशन नहीं किया। नतीजा ये कि पूरे शहर में उबड़-खाबड़ सडक़ों से लोग गुजरने को मजबूर है। दुर्घटना की आशंका बन रही है।
नगरीय प्रशासन ने निकायों को स्पष्ट किया हुआ है कि रेस्टोरेशन बैकफिल में मॉडिफाइड प्रॉक्टर (सडक़ निर्माण में उपयोग होने वाली सामग्री से बना)की 98 प्रतिशत डेंसिटी होना चाहिए। ऐसा कुछ नहीं किया जाता। सडक़ खराब होने को राशि में निकाले और 400 किमी लंबी ही पक्की सडक़ों की बात करें तो खुदाई में अब तक करीब 40 करोड़ रुपए की सडक़ें खराब की जा चुकी है।
रेस्टोरेशन के लिए निगम की एजेंसियों को ही एक करोड़ जमा
नगर निगम की पाइपलाइन, स्मार्टसिटी के स्मार्टपोल की केबल बिछाने खुदाई की अनुमति लेने के लिए प्रति मीटर की दर से संबंधित सडक़ एजेंसियों को करीब एक करोड़ रुपए की बड़ी राशि जमा की हुई है। इसमें पीडल्ब्यूडी से लेकर सीपीए व खुद नगर निगम शामिल है। बावजूद इसके संबंधित एजेंसियों ने काम नहीं किया। कोलार मेन लाइन जैसे बड़े प्रोजेक्ट में जरूर निर्माण एजेंंसी को ही रेस्टोरेशन करना है, लेकिन वह नहीं कर रही।
नगरीय प्रशासन ने फरवरी 2018 से जारी कर रखी है खुदाई की गाइडलाइन
- सीवरेज परियोजना और जलप्रदाय नेटवर्क बिछाने के लिए अलग-अलग सडक़ों को न काटे।
- नगरीय निकाय स्तर पर प्रोजेक्ट डेवलपमेंट एंड मॉनीटरिंग कमेटी व नगरीय निकाय के कार्य प्रभारी इंजीनियर, जलप्रदाय एवं सीवरेज परियोजना के ठेकेदार के साथ समन्वय बनाकर कोऑर्डिनेशन प्लान बनाए।
- जलप्रदाय कनेक्शन का काम जो काम आमतौर पर नेटवर्क डालने के बाद किया जाता है, इस प्रथा में सुधार करते हुए पाइप लाइन डालने के साथ ही हाउस सर्विस कनेक्शन भी दे दिया जाए, ताकि बार-बार सडक़ न खोदना पड़े।
- सीवेज लाइन या पेयजल लाइन डालने की खुदाई में मिट्टी, मलबा यदि सडक़ के यातायात को बाधित करता है तो इंजीनियर-ठेकेदार के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।
- पाइप लाइन डालने के लिए ट्रेंच खुदाई की अनुमति तभी दी जाए जब स्थल पर समुचित कॉम्पेक्टर की व्यवस्था हो।
- सडक़ खुदाई के स्थल पर नागरिकों की जानकारी के लिए प्रोजेक्ट की पूरी डीटेल हो।
- प्रत्येक वार्ड में एक नागरिक बोर्ड लगाया जाए। इसपर वार्ड का नक्शा लगे, जिसमें अलग-अलग रंग में दर्शाया गया हो कि कहां सीवर लाइन-पानी की पाइन बिछाई जाना है। प्रोजेक्ट का नाम, लागत, ठेकेदार और इंजीनियर का नाम भी हो, ताकि नागरिक शिकायत कर सकें।
अभी इसके लिए हो रही खुदाई
- 45 किमी लंबी कोलार से भोपाल नई लाइन बिछाई जा रही है। 136.69 करोड़ रुपए लागत से।
- 200 किमी लंबी पानी की लाइन शहर के भीतर करीब बिछाने का काम चल रहा है
- 200 किमी लंबी फायबर ऑप्टीकल केबल बिछाना है स्मार्टसिटी को स्मार्टपोल में इंटरनेट कनेक्शन के लिए।
- 550 किमी लंबी फायबर ऑप्टीकल केबल टेलीकॉम कंपनियां शहर के अलग-अलग हिस्सों में बिछा रही है
- 160 किमी लंबी खुदाई हुई कोलार में पानी की लाइन प्रोजेक्ट के लिए
- 70 किमी की खुदाई अभी होना है कोलार को केरवा के पानी का प्रोजेक्ट के तहत।
यहां चल रही है खुदाई
- 132 करोड़ रुपए के सीवेज प्रोजेक्ट के लिए कोलार में खुदाई चल रही है
- 01 माह पहले से खोद दी पुराने शहर के लोहा बाजार से लक्ष्मी टॉकीज की और जा रही सडक़ को नाली निर्माण के लिए - अशोका गार्डन से लेकर द्वारका नगर, पंजाबी बाग, सेमरा में नाली निर्माण के नाम पर लगातार खुदाई जारी है
- वीआईपी रोड पर तालाब किनारे पाइप लाइन के लिए फुटपाथ खोद दिए गए
- पुराने शहर में लोहा बाजार से लक्ष्मी गल्ला मंडी तक की रोड नाली निर्माण के नाम पर एक माह पहले से खुदी पड़ी है
- बैरागढ़ में नाली निर्माण के लिए सडक़ें एक माह से अधिक समय से खुदी पड़ी है।
एक साल में एक कार्रवाई फिर प्रशासन सुस्त
खुदाई और उसके रेस्टोरेशन में गड़बड़ी करने वाली ठेका एजेंसी पर नगरीय प्रशासन व निगम प्रशासन ने फरवरी 2018 में कार्रवाई की थी। लिंक रोड नंबर दो पर ही नई लाइन डालने के बाद देरी से व कमजोर रेस्टोरेशन किया। नगरीय प्रशासन इएनसी प्रभाकांत कटारे ने तत्कालीन अपर आयुक्त वीके चतुर्वेदी के साथ निरीक्षण कर गड़बड़ पाया। नए सिरे से रेस्टोरेशन कराया।
उलझी हुई सडक़ें इसलिए बेतरतीब खुदाई
- 1494 किमी की सडक़ें नगर निगम के पास
- 411 किमी की सडक़ें पीडब्ल्यूडी के पास
- 68 किमी की सडक़ें सीपीए के पास
- 527 किमी सडक़ें बीडीए, हाउसिंग बोर्ड, नेशनल हाइवे, स्टेट हाइवे
- 2600 किमी से अधिक है कुल सडक़ें
हमने खुदाई और रेस्टोरेशन की गाइडलाइन तय कर रखी है। ये सही है इसका पालन नहीं हो रहा, सडक़ें खराब हो रही और लोग भी परेशान है।
- प्रभाकांत कटारे, इंजीनियर इन चीफ नगरीय प्रशासन
हमारी सडक़ों पर खुदाई के लिए राशि जमा कराते हैं, उसके बाद स्थानीय इंजीनियर उनका रेस्टोरेशन कराते हैं। कहीं कोई गड़बड़ है तो बताइए हम फिर से दिखवा लेंगे।
- जवाहरसिंह, सीपीए
Published on:
02 Apr 2019 07:49 am
बड़ी खबरें
View Allभोपाल
मध्य प्रदेश न्यूज़
ट्रेंडिंग
