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एम्स में हो सकेगी हवा से फैलने वाले खतरनाक वायरस की जांच

देश में 12 से भी कम हैं इस तरह की लैब

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एम्स में हो सकेगी हवा से फैलने वाले खतरनाक वायरस की जांच

भोपाल. अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) में अब हवा के जरिए फैलने वाले खतरनाक वायरस और बैक्टीरिया की जांच हो सकेगी। इसके लिए रविवार को बायोसेफ्टी लेवल-3 लैब का शुभारंभ किया गया। पांच करोड़ की लागत से बायो सेफ्टी लेवल-3 (बीएसएल) लैब में यलो फीवर, स्वाइन फ्लू समेत हवा के जरिए फैलने वाले वायरस, बैक्टीरिया के साथ एचआइवी, जीका और इंफ्लूएंजा की जांच हो सकेगी। यहां जांच के नमूने लेने के लिए भी ऑटोमेटिक व्यवस्था होगी।
विश्व टीबी दिवस पर आयोजित एक कार्यशाला के दौरान इस लैब का शुभारंभ किया गया। इस अवसर पर आइसीएमआर के डायरेक्टर जनरल डॉ. बलराम भार्गव विशेष रूप से उपस्थित थे। उन्होंने बताया कि देश में इस तरह की 12 से भी कम लैब हैं। इसके अलावा देशभर में संचालित हो रहे सभी एम्स में भी यह पहली लैब है।
एम्स के निदेशक डॉ. सरमन सिंह ने बताया कि विश्व टीबी दिवस पर एम्स में विशेष वार्ड का शुभारंभ किया गया। 14 बिस्तरों के इस वार्ड में एमडीआर टीबी के मरीजों को भर्ती किया जाएगा। उन्होंने कहा कि केन्द्र सरकार का लक्ष्य है कि 2025 तक देश से टीबी को पूरी तरह खत्म करना है। यह प्रयास इसी को लेकर किया जा रहा है।

सैंपल लेने की प्रक्रिया भी रहेगी ऑटोमेटिक
बीएसएल-3 लैब लोहे के बंकरनुमा आकृति की होगी। इस लैब में प्रवेश करते ही डॉक्टर का पूरा शरीर स्ट्रेलाइज हो जाएगा। सैंपल कलेक्शन की प्रक्रिया ऑटोमेटिक होगी। टेस्ट ट्यूब में सैंपल रखने के लिए डॉक्टर को मशीन में हाथ डालना पड़ेगा। इसके बाद ऑटोमेटिक मशीन सैंपल ले लेगी।
इसलिए है जरूरत : हवा के जरिए फैलने वाले वायरस खतरनाक होते हैं। कुछ ही समय में ये लोगों को अपना शिकार बनाने लगते हैं। स्वाइन फ्लू के मामले में ऐसा देखने को मिला है। इसके बाद प्रमुख शहरों में वायरस की जांच के लिए अलग से लैब खोली जा रही हैं।