
Upper lake bhopal
भोपाल. क्रिसमस के साथ ही साल के अंत का पर्यटन सीजन शुरू हो चुका है। नए साल के स्वागत और साल 2022 की विदाई के लिए शहर के होटल बुक हो चुके हैं। राजधानी भोपाल के आसपास के पर्यटक स्थलों पर बाहर के सैलानियोंं ने पहुंचना शुरू कर दिया है। वन अभयारण्यों में भी भीड़ बढ़ गयी है। भोपालवासियों और यहां पहुंचे सैलानियों को शौर्य स्मारक, भारत भवन, भीमबेटका, शहीद भवन और बड़ा तालाब व छोटा तालाब के पास मस्ती करते हुए देखा जा सकता है। आफिसों में 30 प्रतिशत उपस्थिति कम हो गयी है।
झीलों की नगरी भोपाल के बड़ा तालाब और छोटा तालाब पर्यटकों की पहली पसंद हैं। इसके बाद शौर्य स्मारक, भारत भवन, भीमबेटका, शहीद भवन जैसी जगहें भी पर्यटकों को अपनी ओर आकर्षित कर रही हैं। ऊपरी झील, जिसे 'भोजताल' या 'बड़ा तालाब' भी कहते हैं। यह भारत की सबसे पुरानी मानव निर्मित झील है। इस झील के आसपास कमला पार्क गार्डन में इन दिनों सैलानियों की भीड़ उमड़ रही है।
वन विहार राष्ट्रीय उद्यान
ऊपरी झील के नजदीक स्थित, वन विहार राष्ट्रीय उद्यान में विदेशी फूलों की प्रजातियों के अलावा ब्लैकबक, चीतल, सांभर, ब्लू बुल, साही, जंगली सूअर और लकड़बग्घा जैसे वन्यजीव प्रकृतिप्रेमियों को लुभा रहे हैं। एडवेंचर के शौकीन भी यहां पहुंच रहे हैं।
संाची स्तूप की भव्यता बेजोड़
भोपाल से कुछ ही किमी दूर सांची स्तूप में भी पर्यटकों की भीड़ है। अपनी बेजोड़ भव्यता के लिए मशहूर यह स्तूप तीसरी शताब्दी ईसा पूर्व में मौर्य राजवंश के महान सम्राट अशोक के शासनकाल में बनाए गए थे। यह देश के सबसे उल्लेखनीय बौद्ध स्मारकों में से एक है। स्तूप के विशाल गुंबद में एक केंद्रीय तिजोरी है जहां भगवान बुद्ध के अवशेष रखे गए हैं।
भोपाल का भीमबेटका गुफाएं
राजधानी से करीब 45 किमी दक्षिण में स्थित, स्मारक भीमबेटका गुफाओं को यूनेस्को की विश्व धरोहर स्थल घोषित किया गया है। यह गुफाएं 30,000 साल से भी पुरानी हैं। यह स्थान महाभारत के भीम के चरित्र से संबंधित है, इसलिए इसका नाम भीमबेटका है। गुफाओं के भीतर सुंदर रूप से गढ़ी गई चट्टानों की संरचनाएं घने, हरे-भरे वनस्पतियों और लकडिय़ों से घिरी हुई हैं। कलाप्रेमी इसे देखने पहुंच रहे हैं।
शौकत महल
इस्लामी वास्तुकला और स्थापत्य कला के नमूने देखने के शौकीन शौकत महल पहुंच रहे हैं। चौक क्षेत्र में सिकंदर बेगम के शासनकाल में बनाई गई यह इमारत, पुनर्जागरण और गॉथिक शैलियों का एक अनूठा मिश्रण प्रदर्शित करती है। इसके अलावा देश के दिलचस्प मस्जिदों में से एक मोती मस्जिद को देखने को भीड़ उमड़ रही है। इसका निर्माण 1862 में महिला सिकंदर जहान बेगम ने करवाया था। सुंदर, शुद्ध सफेद संगमरमर से तैयार इस मस्जिद की वास्तुकला जामा मस्जिद के समान है। बिड़ला संग्रहालय, लक्ष्मी-नारायण मंदिर, ट्राइबल म्यूजियम में भी लोग पहुंच रहे हैं।
Updated on:
25 Dec 2022 02:57 pm
Published on:
25 Dec 2022 02:56 pm
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