इसके बाद एक छोटे से फैशन इंस्टीट्यूट में जाना शुरू किया, लंबे समय तक फीस नहीं भर पाई, इसलिए छोडऩा पड़ा। फेब्रिक्स और फैशन डिजाइनिंग के बारे में अब तक थोड़ा समझ आने लगा था। इसी बीच बड़ोदरा के एक डिजाइनिंग इंस्टीट्यूट में नौकरी मिल गई। यहां से एक फैशन शो में मुंबई जाने का मौका मिला, जहां मेरी ड्रेसेज को सराहा गया।