25 जनवरी 2026,

रविवार

Patrika LogoSwitch to English
icon

मेरी खबर

video_icon

शॉर्ट्स

epaper_icon

ई-पेपर

W DAY: पॉलीथीन में बंद कर मां ने कूड़े में फेंकी बेटी

फूल जैसी बच्ची को पॉलीथीन में डाल कर फेंक दिया गया था। एक कूड़ा बीनने वाले ने लाश देखी तो हल्ला मचा.

4 min read
Google source verification

image

Juhi Mishra

Mar 08, 2016

Newborn thrown among thorns

Newborn thrown among thorns


भोपाल। वो जी ही न सकी और मर गई। निष्ठुर हाथों ने उसे कचरा समझकर डस्टबिन में फेंक दिया, लेकिन मरने के बाद भी उसे सताया गया। महिला दिवस पर उत्सव की तैयारियों के बीच मासूम नवजात के शव को उठाने के लिए जरूरी पांच दस्तख्त का इंतजाम भी कठिन हो गया। राजधानी के पॉश इलाके अरेरा कॉलोनी में महिला दिवस से 24 घंटे पहले कूड़ेदान में एक नवजात बेटी का शव मिला। फूल जैसी बच्ची को पॉलीथीन में डाल कर फेंक दिया गया था। एक कूड़ा बीनने वाले ने लाश देखी तो हल्ला मचा। अमीर लोगों ने अपने दरवाजों से झांका और किवाड़ बंद कर लिए। कोई खोज-खबर लेने नहीं निकला। ... लेकिन एक गरीब की आत्मा जिंदा थी। उसने तत्काल पुलिस को खबर दी। बच्ची की लाश को पोस्टमार्टम तक भिजवाने में हाथ बंटाया।



newborn found in garbage

सोमवार को अरेरा कॉलोनी में रोजाना की तरह सन्नाटा पसरा था। सुबह आठ बजे ई-5 सेक्टर में मकान नम्बर 179 के सामने पार्क के बाहर रखे डस्टबिन से पॉलीथीन बटोरने के लिए एक लड़के ने डंडा चलाया तो एक पॉलीथीन का मुंह खुलते ही वह चीख पड़ा। उसमें एक प्यारी, कोमल और निष्पाप नवजात बिटिया की लाश थी। लाश देखकर वह भागा और दस कदम आगे कपड़े प्रेस करने वाले पप्पू लश्करी ने टोका तो बताया कि डस्टबिन में लाश पड़ी है। पप्पू मौके पर पहुंचा और मोहल्ले वालों को बुलाया। लोग घरों से निकले, डस्टबिन में झांका और नाक पर रूमाल लगाकर लौट गए। जाते-जाते पप्पू को भी नसीहत देते गए कि पप्पू इस पचड़े में पडऩा ठीक नहींÓ।


पप्पू भी लौटा तो पत्नी सीमा ने सामाजिक जिम्मेदारी का अहसास कराया, बोली- कुछ करो किसी की मिट्टी (शव) को खराब मत होने दो। इसके बाद पप्पू ने हबीबगंज पुलिस को खबर दी। एक बार फिर सम्भ्रांत दिल कठोर हो गए। पुलिस आई, दरवाजे खटखटाए, लेकिन कोई बाहर नहीं निकला। कुछ चेहरे बाहर निकले, लेकिन कोई है नहींÓ का हवाला देकर किवाड़ बंद कर लिए। पुलिस पंचनामा करने के लिए पांच लोगों का इंतजार करती रही, लेकिन इस कॉलोनी में पंचनामे पर दस्तख्त करने वाले पांच लोग न मिले। फिर भी पप्पू आगे आया राह चलते कुछ लोगों को रोका और पंचनामा कराने के बाद बिटिया की लाश को पोस्टमार्टम के लिए हमीदिया भिजवाया।



झोपड़ी में इंसानियत
पप्पू ने लोगों से मदद करने को कहा तो उसे झिड़क दिया गया। नसीहत भी मिली कि पचड़े से दूर रहो, पुलिस के पंगे में फंसे तो दुकानदारी भी चौपट हो जाएगी। पप्पू घर लौट आया। पत्नी को कोठियों की हरकत मालूम हुई तो उसने पप्पू को इंसानियत का कर्तव्य याद दिलाया। पप्पू ने पुलिस का डर बताया तो कहाकि जो होगा-देखा जाएगा, लेकिन बिटिया को मिट्टी नहीं मिली तो भगवान भी माफ नहीं करेगा। उसने कहाकि कोई कुछ भी करे, लेकिन इंसानियत को जिंदा रखना होगा। सीमा कहती हैं कि वह तो बड़े लोगों को घरों में बर्तन मांजती-धोती हैं, लेकिन यह बिटिया की जिम्मेदारी नहीं निभाने का कलंक लग जाएगा तो धोना मुश्किल होगा।


पंचनामा भी मुश्किल
पप्पू कुछ देर तक तो अपने टट्टर के नीचे कपड़े प्रेस करता रहा और रखवाली भी, ताकि कोई कुत्ता बिटिया की लाश नहीं नोंचने पाए। उसके पास पुलिस का नंबर नहीं था। एक घंटा बीत गया, लेकिन पुलिस नहीं आई तो उसने अपनी जीवनसंगिनी को पहरेदारी पर बैठाया और भागता हुआ हबीबगंज थाने पहुंचकर घटना के बारे में बताया। पुलिस आई, बिटिया की लाश को कूड़े से निकाला गया। पुलिस ने पंचनामा के लिए कोठियों में दस्तक दी तो कुछ चेहरे बाहर निकले। पंचनामा के लिए दस्तखत मांगे तो जवाब दिया कि कुछ भी नहीं जानते। पुलिस ने कहाकि सिर्फ दस्तखत करना है, जानकारी से लेना-देना नहीं, इस तर्क के बाद साफ इंकार करते हुए वापस कोठियों में दुबक गए।

ये भी पढ़ें

image

संबंधित खबरें

डीएनए जांच होगी
पुलिस फिलहाल नवजात की पीएम रिपोर्ट मिलने का इंतजार कर रही है। हबीबगंज के थानेदार रवींद्र यादव ने दोपहर में बताया कि लाश आठ घंटे पुरानी लग रही है। बहरहाल पुलिस ने ििबटिया के परिजनों की शिनाख्त के लिए डीएनए सैंपल भी लिया है।

आसपास दर्जनों नर्सिंग होम
साथ ही घटनास्थल के आस-पास स्थित आधा दर्जन नर्सिंग होम के रिकॉर्ड भी खंगालेगी। जांच से मालूम होगा कि रविवार-सोमवार के दरमियान इन नर्सिंग होग में कितनी प्रसूताओं की डिलेवरी हुई। इन प्रसूताओं के डीएनए से नवजात का डीएनए मिलान किया जाएगा।


फिर भी जीना लड़की
बच भी जाओगी
केरोसिन में छुलाई जाती
तीली की बदबूदार लपट से,
पर कैसे बचोगी पिता के माथे पर गहरा आई लकीरों के फंदे से?
तुम्हें पैदा करने के अपराध बोध से ग्रस्त मां की आंखों के अंधे कुएं से?
बिटिया !
अब तो मां की कोख भी महफूज नहीं रही तुम्हारे लिए
जहां तैर लेती थीं तुम नौ माह निद्र्वन्द्व
तुम्हें तलाशते
गण्डे-ताबीजों के अलावा हमारे पास अब
अल्ट्रा साउंड की भेदती आंखें हैं,
कोरियन बायोप्सी की तीखी सलाई है
तुम फिर भी जीना लड़की!
जितनी बार मरना
उतनी ही बार जी जाना
हमारी मृत संवेदनाओं के किलिमन्जारो में!
- डॉ वीणा सिन्हा, कवियित्री और सीएमएचओ भोपाल

ये भी पढ़ें

image