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भानपुर खंती के आसपास भूजल हुआ दूषित, पीने लायक नहीं बचा पानी

- एनजीटी को एमपीपीसीबी द्वारा सौंपी गई रिपोर्ट में खुलासा, पीसीबी ने हैवी मेटल्स की जांच ही नहीं की- पीसीबी, पीएचई और ग्राउंड वाटर बोर्ड को हर महीने देना थी रिपोर्ट लेकिन न मॉनीटरिंग की और रिपोर्ट दी, इससे एनजीटी ने दोबारा खोला केस

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भोपाल

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Sunil Mishra

Jul 19, 2021

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भोपाल। नगर निगम द्वारा भानपुर खंती के साइंटिफिक क्लोजर का दावा भले ही किया जा रहा हो लेकिन हकीकत यह है कि ऊपर से कचरा भले ही हटा दिया गया हो लेकिन नीचे का तरल लीचेट अभी तक नहीं हटाया गया है। अभी भी इसका 50 प्रतिशत काम बाकी है। इसमें तमाम तरह के प्रदूषक मौजूद हैं जिससे खंती के आसपास का भूजल भी पीने लायक नहीं बचा है। एनजीटी के निर्देश पर मप्र प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड द्वारा खंती के आसपास के जलस्रोतों के पानी की जांच में यह खुलासा हुआ है। हालांकि पीसीबी ने भी कई खतरनाक प्रदूषकों की जांच ही नहीं की है जो मानवीय स्वास्थ्य के लिए खतरनाक हैं। एनजीटी ने इस मामले को फिर से स्वत: संज्ञान लेकर खोला है और एमपीपीसीबी से रिपोर्ट मांगी थी। इसके पहले एनजीटी ने 15 नवंबर 2016 को यह निर्देश दिए थे कि जब तक साइट बंद नहीं हो जाती तब तक हर महीने पीसीबी, पीएचई और सेंट्रल ग्राउंड वाटर बोर्ड यहां की मॉनीटरिंग रिपोर्ट सौंपेंगे। लेकिन केवल पीसीबी ने बीच में कुछ रिपोर्ट दी है, अन्य एजेंसियों ने न मॉनीटरिंग की और न रिपोर्ट दी है। सोमवार को इस मामले की सुनवाई होगी।

एमपीपीसीबी की रिपोर्ट में बताया गया है कि भानपुर खंती के आसपास डेढ़ किमी के दायरे में मौजूद खेजड़ा बरामद, रासलाखेड़ी, भानपुर, मोहाली गांवों के 6 हैंडपंप और ट्यूबवेल से सेंपल लिए गए और उनकी जांच की गई। इनमें से 5 जलस्रोत का पानी सीधे पीने लायक नहीं मिला है। पेयजल में तय मापदंडों के अनुसार कोलीफोर्म बैक्टीरिया की संख्या प्रति लीटर पानी में 100 से अधिक नहीं होनी चाहिए। लेकिन जांच में कोलीफोर्म की संख्या 1600 तक पाई गई है। यह बैक्टीरिया गंदगी में ही पनपते हैं। इसके साथ वायु गुणवत्ता की स्थिति भी भानपुर खंती के पास ठीक नहीं पाई गई। यहां पीएम-10 की संख्या तय मानकों से ज्यादा मिली है। हालांकि आसपास के गांवों में स्थिति ठीक पाई गई। एमपीपीसीबी ने अपनी यह रिपोर्ट एनजीटी को सौंपी है। गौरतलब है कि भानपुर खंती के संबंध में डॉ सुभाष सी पांडे ने अक्टूबर 2013 में केस लगाया था। इसके बाद 15 नवंबर 2016 को साइंटिफिक क्लोजर के आदेश जारी किए थे।

खतरनाक तत्वों की नहीं हुई जांच
एमपीपीसीबी ने जांच में भी केवल क्लोराइड, सल्फेट, नाइट्रेट, हार्डनेस, पीएच आदि की ही जांच की है। जबकि कचरा खंती के लिहाज से जो जांचें होनी चाहिए उनकी जांच ही नहीं की। यहां पर पानी में घुलित ऑक्सीजन, बीओडी, सीओडी, हैवी मेटल्स की भी जांच होनी चाहिए। तभी पता चलता कि भूजल में जहरीले तत्व मौजूद हैं या नहीं।

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हार्डनेस और कोलीफॉर्म बैक्टीरिया की स्थिति

स्थान- कोलीफॉर्म- कुल हार्डनेस

रतन नगर रासलाखेड़ी- 1600- 298
खेजड़ा बरामद- 1600- 286

खेजड़ा बरामद खंती के पास- 1600- 382
भानपुर गांव- 34- 346

भानपुर गांव- 920- 244
मोहाली गांव- 240- 236

नोट- सीपीसीबी के मापदंडों के अनुसार पेयजल में कोलीफॉर्म 100 एमपीएन 100 मिली और हार्डनेस 200 मिग्रा प्रति लीटर से अधिक नहीं होना चाहिए।

वायु प्रदूषण की स्थिति

मॉनीटरिंग स्टेशन स्थल- पीएम 10- पीएम 2.5
महोली- 89.4- 48.4

खेजड़ा बरामद- 82.2- 35.6
भानपुर खंती- 110.6- 49.8