
भोपाल. आज के दिन नो टोबैको डे के रूप में हम लोग मानते है यानि की 31 मई को विश्व तंबाकू निषेध दिवस (World No Tobacco Day) मनाया जाता है आज ही के दिन तबाकू का जो लोग सेवन करते है उन लोगो पर रोक लगाने या इस्तेमाल को काम करने के लिए लोगो को प्रेरित किया जाता है।
इस दिन का सबसे बड़ा उद्देश्य ये होता है की तबाकू से होने वाली बीमारियों के बारे में बताया जाता है WHO के मुताबिक, तंबाकू के सेवन से दुनियाभर में हर साल 80 लाख से ज्यादा लोग मरते हैं.
"विश्व धूम्रपान निषेध दिवस" की शुरुवात कब हुई
WHO ने 1987 में विश्व स्वास्थ्य सभा ने WHA40 का प्रस्ताव पारित कियाऔर 7 अप्रैल 1988 को "विश्व धूम्रपान निषेध दिवस" के रूप में मानाने का फैसला लिया और इस दिन का सबसे बड़ा टारगेट था की जो लोग तबाकू के उपयोगकर्ता है उनको 24 घंटे के लिए तबाकू का सेवन करने से दूर रहने का आग्रह करना था और उनको ये उम्मीद थी कि जो लोग तमाकू को छोड़ने चाहते है उनके लिए ये दिन सहायता प्रदान की जाएगी।
हर साल अलग अलग होती है थीम
विश्व तंबाकू निषेध दिवस के लिए हर साल एक थीम तैयार किया जाता है और उसी हिसाब से कार्यक्रमों का आयोजन किया जाता है। बीते साल यानी साल 2021 का थीम है 'कमिट टू क्वीट' (Commit to Quit) यानी 'छोड़ने के लिए प्रतिबद्ध और वही इसी साल विश्व तंबाकू निषेध दिवस की थीम "पर्यावरण की रक्षा करें" है. इस साल की थीम पर्यावरण पर तंबाकू के प्रभाव पर केंद्रित है.
जानिए तम्बाकू से हर साल कितनी मौत
हर साल वही तंबाकू से 80 लाख से ज्यादा लोगो की मौत होती है WHO के एक सर्वे के अनुसार पुरे विश्व में करीब तम्बाकू के कैंसर के 2.5 करोड़ से ज्यादा मरीज है और वही यही हाल रहा तो 2025 तक 3.0 करोड़ होने की सम्भावना है। 2020 के आंकड़ों के अनुसार तंबाकू सेवन कर्ताओं में लगभग 20 प्रतिशत महिलाएं भी शामिल हैं और इसी के साथ भारत तंबाकू का दूसरा सबसे बड़ा उत्पादक और उपभोक्ता है
तंबाकू के सेवन से होने वाली बीमारिया
जो लोग तम्बाकू का सेवन करते है उनको फेफड़ों का कैंसर फेफड़ों के कैंसर का मुख्य कारण तंबाकू को ही माना जाता है। और इसी के साथ इरेक्टाइल डिस्फंक्शन , लिवर कैंसर, मुंह का कैंसर,डायबिटीज का खतरा बढ़ जाता है और वही हृदय रोग, कोलन कैंसर, ब्रेस्ट कैंसर और जो लोग धुएं रहित तंबाकू (चबाने वाले तंबाकू, गुटका) का उपयोग करते हैं उनमें मुंह के कैंसर (जीभ, गाल, जबड़े की हड्डी) का खतरा सबसे अधिक होता है. इसके लक्षणों में मुंह का कम खुलना, बार-बार छालें होना, आवाज में बदलाव, लगातार खांसी और वजन का कम होना शामिल है।
Published on:
31 May 2022 03:21 pm
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