
Personality : जीवन कर दिया कला के नाम समर्पित,देश में नाट्य विधा की बनाई पहचान
भोपाल। जनजातीय संग्रहालय में चल रहे एकाग्र समारोह यक्षकथी के दूसरे दिन तेलंगाना के सुदूर यदाद्रि गांव के कलाकारों ने भू-कैलाश प्रसंग का मंचन किया। यह प्रस्तुति चिण्डू भागवतम शैली कहलाती है जिसे तेलंगाना के तीन जिले निजामाबाद, करीम नगर और यदाद्रि में किया जाता है।
यहां करीब 150 ग्रुप्स पौराणिक कथाओं का मंचन करते हैं। तेलगु की करीब तीन सौ जातियां इससे जुड़ी हुई हैं। खास बात है कि पौराणिक कथाओं को कोई लिखित स्क्रीप्ट मौजूद नहीं है। पीढ़ी दर पीढ़ी मौखिक शिक्षा के बल पर इस परंपरा को पिछले 500 सालों से जिंदा रखा गया है। चिण्डू भागवतम संस्कृत बेस्ड तेलगु शैली है। पहले इसका मंचन गांवों में मनोरंजन के लिए किया जाता था। जनजातीय में आए कलाकार अब तक इसके 68 शो कर चुका है। ग्रुप के 15 कलाकार खेती-बाड़ी करते हैं।
शुभ दिन देख काटा जाता है पेड़, तब बनते हैं गहनें
चिण्डू भागवतम के सभी कलाकार पोलकी पेड़ की लकड़ी के गहने पहनते हैं, जो वजन में काफी हलकी होती है। इस पेड़ की लकड़ी को शुभ दिन देखकर काटा जाता है। इससे मुकुट, हार, कुंडल, बाजुबंद, कमरबंद, माला, पैर के कड़े और हार बनाया जाता है।
मेकअप में यूज होने वाली सामग्री भी ये खुद ही बनाते हैं। इन गहनों का वजन पांच किलोग्राम तक होता है। तेल, कपूर और घी से काजल तैयार किया जाता है। हल्दी, सिंदूर और कुमकुम से मेकअप सामग्री। तिली के तेल में हल्दी मिलाकर चेहरे पर बेस तैयार किया जाता है। एक कलाकार को मेकअप करने में तीन घंटे का समय लगता है। महिलाएं तीन से चार साडिय़ां मिलाकर अपनी ड्रेस तैयार करती है।
श्रीलंका की कहानी है भू-कैलाश
भू-कैलाश की प्रस्तुति की मूल कथा महाबली रावण की मां की शिवभक्ति और मां के लिए रावण के प्रयत्नों को पेश करती है। प्रस्तुति में दिखाया गया कि रावण की मां भगवान शिव की प्रतिदिन पूजा करती हैं। एक दिन व्रत के वशीभूत महाशिवरात्रि होने से वे उनकी वंदना पर्वत शिखर पर जाकर नहीं कर पातीं।
इधर नारद व्रत रोकने की कोशिश करते हैं। वे दुतरफा परिस्थितियों को निर्मित करते हैं। रावण मां को दिए वचन का पक्का है सो भगवान शिव से आत्मलिंग प्रदान करने की प्रार्थना के साथ अपनी यात्रा शुरू करता है। कथा में नारद की चिंता, रावण का मूल उदेश्य से विस्मृत हो जाना और शिव से प्राप्त आत्मलिंग को श्रीलंका तक ले जाने में विफल होने की कथा पेश की गई।
Published on:
20 Jun 2018 10:45 am
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