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अब चाय, समोसा-कचौड़ी दुकानदारों को भी बनवाना पड़ेगा फूड लाइसेंस

30 हजार से ज्यादा हैं दुकानें, 15 हजार ने ही लिया है फूड लाइसेंस

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भोपाल। राजधानी के होटल-रेस्टोरेंट सहित किराना दुकानदारों ने फूड लाइसेंस ले रखे हैं, लेकिन गली मोहल्लों में खुली किराना, चाय-नाश्ता की दुकान चलाने वाले दुकानदार फूड लाइसेंस नहीं बनवाते है, जिससे इन दुकानों की निगरानी करने में दिक्कत होती है। इसे देखते हुए अभियान चलाकर इन दुकानदारों के लाइसेंस बनाए जाएंगे। इसके लिए खाद्य विभाग वार्ड दफ्तरों में तैनात अमले की मदद लेगा। दरअसल राजधानी में अब तक सिर्फ 15 हजार दुकानदारों ने ही फूड लाइसेंस लिया है, जबकि तीस हजार से अधिक छोटे-बड़े दुकानदार खाद्य सामग्री बेच रहे हैं। गुरुवार को कलेक्टर अविनाश लवानिया ने खाद्य सुरक्षा विभाग के अफसरों के साथ बैठक की जिसमें अभियान चलाकर लाइसेंस बनाने की हिदायत दी है।

सरकारी हॉस्टल की मैस को लेना होगा

बैठक में कलेक्टर ने बताया कि शहर में सहायक आयुक्त आदिवासी विकास सहित अन्य विभागों के सरकारी और प्राइवेट हॉस्टलों में संचालित मैस में छात्रों के लिए खाना बनाया जाता है। ऐसे में इसका फूड लाइसेंस लेना अनिवार्य है।

हर माह होती है कम से कम 100 प्रतिष्ठानों की जांच

भोपाल शहर में बिक रहा छोला, पनीर या फिर रसगुल्ला की गुणवत्ता कैसे है इसकी जांच करने और खाद्य सामग्री का नमूने लेने का काम दिल्ली में बैठी टीम कर रही है। भारतीय खाद्य संरक्षा एवं मानक प्राधिकरण (एफएसएसएआई) स्रह्य अफसर हर महीने शहर के करीब सौ प्रतिष्ठानों जिनमें रेस्टोरेंट, मैन्युफैक्चरर और खाद्य निर्माता प्रतिष्ठान आते हैं उनके नामों की सूची जिला अभिहित अधिकारी को भेजते हैं। किन दुकानों का सर्वे होना है या दुकान की खाद्य सामग्री की जांच की जानी है इसका निर्धारण किसी शिकायत पर नहीं बल्कि एफएसएसएआई के फॉस्कोस सॉफ्टवेयर से तय होता है। कंप्यूटर से ही पर्ची जेनरेट होती है और लक्ष्य के हिसाब से भोपाल भेज दी जाती है।

भोपाल के जिला अभिहित अधिकारी संजय श्रीवास्तव दिल्ली से भेजी गयी सूची अपने अधीनस्थ कर्मचारियों को उपलब्ध कराते हैं। उस सूची के आधार पर पके हुए खाने जैसे छोला, पनीर, मटर पनीर, कोफ्ता, दम आलू और मिठाइयों की सैंपलिंग की जाती है। देवेंद्र दुबे, मुख्य खाद्य सुरक्षा अधिकारी, भोपाल का कहना है कि ईट राइट के तहत दिल्ली एफएसएसएआई से लक्ष्य मिल रहा है। उसके आधार पर प्रतिष्ठानों के सैंम्पल ले रहे हैं। पके खाने की सैंम्पलिंग बढ़ी है। रूटीन की कुछ कम हुई है।

700 लाइसेंस, 1500 मैन्युफैक्चरर

एफएसएसएआई के फॉस्कोस सॉफ्टवेयर में जिले के 700 रेस्टोरेंट और 1500 मैन्युफैक्चरर का डाटा है। इन्हें खाद्य लाइसेंस मिला है। यह बेकरी से लेकर पापड़, पैक्ड फूड, अचार, टोस्ट व मिठाई आदि बनाते हैं।