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अब 5 साल में होंगे आरा मशीनों के लायसेंस नवीनीकरण

लायसेंस नवीनीकरण के लिये 2,500 रुपये आवेदन शुल्क ने बढ़ा मध्य प्रदेश में करीब साढ़े 3 हजार आरा मशीनें हैं

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भोपाल

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Ashok Gautam

Sep 04, 2021

In the village Badipathar, the Forest Department made a case of timber of a large variety of teak.

ग्राम बड़ीपाथर में वन विभाग ने बड़ी मात्रा में सागौन दूसरी प्रजाति की इमारती लकड़ी का प्रकरण बनाया.


भोपाल। प्रदेश सरकार ने आरा मशीन संचालकों को एक बड़ी रहत दी है। अब आरा मशीनों का लाइसेंस संचालकों को नवीनीकरण पांच साल में कराना होगा। वर्तमान में उन्हें 3 साल में नवीनीकरण कराया जाना अनिवार्य किया गया था। सरकार ने नियमों में यह प्रावधान लकड़ी उद्योग को बढ़ाव देने के लिए किया है। केन्द्र सरकार के ईज ऑफ डूइंग वर्किंग नीति के तरह यह संशोधन किया गया है।
राज्य शासन के वन विभाग द्वारा मध्यप्रदेश काष्ठ चिरान (विनियमन) नियम-1984 में यह संशोधन किया गया है। लायसेंस नवीनीकरण के लिये 2,500 रुपये आवेदन शुल्क ने बढ़ा दी है। आरा मशीन लाइसेंस नवीनीकरण की समय सीमा बढ़ाने से सरकार को हर साल हजारों रूपए का नुकासन होगा। मध्य प्रदेश में करीब साढ़े 3 हजार आरा मशीनें हैं। इन आरा मशीनों को 1996 से पहले पहले लाइसेंस दिया गया है। इसके बाद से सुप्रीम कोर्ट ने आरा मशीनों के नए लाइसेंस जारी करने पर रोक लगा दी थी। कामलनाथ सरकार बनने बाद आरा मशीनों को लाइसेंस फ्री करने के लिए पूरी रूप रेखा तैयार कर ली थी, लेकिन बीच में सरकार ही गिर गई। कटाई के अनुपात से ज्यादा हैं प्रदेश में मशीनें
प्रदेश सरकार ने आरा मशीन और जंगल कटाई का आंकलन राज्य वन अनुसंधान केन्द्र (एसएफआरआई) जबलपुर से 2015 कराया था। एसएफआरआई ने अपनी प्रारंभिक रिपोर्ट में बताया था कि प्रदेश में जितनी आरा मशीनें हैं उनके लिए भी प्रदेश में उत्पादन नहीं है। जंगल की कटाई काम हो रही है और आरा मशीनें उसके अनुसार से अधिक हैं। इसके चलते तत्कालीन सरकार ने आरा मशीन के नए लाइसेंस जारी करने पर रोक लगा रखी थी।


क्यों लगी थी लाइसेंस देने पर रोक
गोधा बर्मन ने सुप्रीम कोर्ट में भूमि उपयोग परिवर्तन को लेकर एक केस सुप्रीम कोर्ट में लगाया गया था। इसी केस के साथ किसी ने सुप्रीमकोर्ट में यह अंतरित एप्लीकेशन लगा दिया कि प्रदेश में जितनी आरा मशीनें हैं, उतना पेड़ों का उत्पादन ही नहीं है। इसको लेकर कोर्ट ने कहा कि सभी राज्य अपने-अपने यहां पेड़ों के उत्पादन और आरा मशीनों की रिपोर्ट तैयार करें। रिपोर्ट में यह आंकलन करें कि जिनता जंगल काटे जा रहे हैं, उसके चिराई के लिए पार्याप्त मशीनें हैं अथवा कम हैं।
कटाई के अनुपात से ज्यादा हैं प्रदेश में मशीनें
प्रदेश सरकार ने आरा मशीन और जंगल कटाई का आंकलन राज्य वन अनुसंधान केन्द्र (एसएफआरआई) जबलपुर से 2015 कराया था। एसएफआरआई ने अपनी प्रारंभिक रिपोर्ट में बताया था कि प्रदेश में जितनी आरा मशीनें हैं उनके लिए भी प्रदेश में उत्पादन नहीं है। जंगल की कटाई काम हो रही है और आरा मशीनें उसके अनुसार से अधिक हैं। इसके चलते तत्कालीन सरकार ने आरा मशीन के नए लाइसेंस जारी करने पर रोक लगा रखी थी।