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स्वच्छ भारत अभियान का ये स्लोगन पढ़ विद्या बालन भी शरमा जाए!

'भाभी' और 'चाची' के संबोधन के साथ बेहद अभद्र भाषा के स्लोगन सरकारी बिल्डिंगों पर सजाए गए हैं। अफसोसजनक यह कि भाषा की गंदगी पर शर्मिंदा होने के बजाय जनपद सीईओ इसे दुरुस्त बताते हैं।

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Anwar Khan

Dec 01, 2016

clean india campaign

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मंडीबामोरा (विदिशा)। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी चाहते हैं कि गांव-गली-नुक्कड़, शहर और चौपाल चमकती-दमकती रहें। सरकार के नुमाइंदों के कंधों पर स्वच्छ भारत मिशन को कामयाब बनाने की जिम्मेदारी है। साफ-सफाई को लेकर लोगों को चौकन्ना करना है। भाषण पढऩे हैं और नारे गढऩे हैं ....लेकिन विदिशा के पास मंडीबामोरा में सफाई के नारों में सड़कछाप भाषा का इस्तेमाल किया गया है। ये एक पल में गुदगुदाते जरूर हैं, लेकिन इन्हें ठीक नहीं कहा जा सकता।

'भाभी' और 'चाची' के संबोधन के साथ बेहद अभद्र भाषा के स्लोगन सरकारी बिल्डिंगों पर सजाए गए हैं। अफसोसजनक यह कि भाषा की गंदगी पर शर्मिंदा होने के बजाय जनपद सीईओ इसे दुरुस्त बताते हैं। उनके मुताबिक लोगों को ऐसी कायदे से भाषा समझ में आएगी, इसलिए स्लोगन सटीक हैं। स्लोगन में महिलाओं को ही क्यों संबोधित किया गया? इसका जवाब भी उनके पास नहीं है।




विदिशा जिले के मंडीबामोरा की ग्राम पंचायतों को घर-घर शौचालय निर्माण कराने के लिए 28 नवंबर से 25 दिसंबर तक विशेष अभियान चलाने को कहा गया है। नाम दिया गया है- 'शर्म से गर्म अभियान'। मंडीबामोरा में यह अभियान बेहद शर्मनाक हालात में शुरू किया गया है। जगह-जगह दीवारों पर ऐसे नारे लिखे गए हैं, जिन्हें पढ़कर महिलाओं का असहज होना लाजिमी है। मंडीबामोरा के पंचायत सचिव सुरेश राय कहते हैं कि सभी स्लोगन जनपद पंचायत से मिले हैं और जस की तस भाषा में दीवारों पर लगाने के निर्देश दिए गए हैं।




छेड़छाड़ का जरिया बने स्लोगन
मवालियों की जमात ऐसे स्लोगन को लेकर चहक रही है। कस्बे के बाजार में महिलाओं को देखकर लफंगे तेज आवाज में इन स्लोगन को दोहराते हैं। महिलाओं को मजबूर होकर अपमान का घूंट पीकर आगे बढऩा पड़ता है।

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बेशर्म बोल : यही भाषा समझ में आती है....
अभद्र भाषा के स्लोगन पर बीना के जनपद पंचायत सीईओ राकेश शुक्ला को कोई मलाल नहीं हैं। उनका कहना है कि लोगों को जागरूक करने के लिए यह जरूरी है कि ऐसी भाषा लिखी जाए, जो आसानी से समझ में आए। इसी भावना के मद्देनजर सफाई अभियान को लेकर नारे गढ़े गए हैं और गंदी भाषा जैसी कोई बात नहीं है।




इनका कहना है...
इस तरह के सभी स्लोगन समाज के लोगों से लिखवाए गए हैं। अलग-अलग क्षेत्रों में दीवारों पर ऐसे स्लोगन लिखवाकर लोगों को मानसिक रूप से स्वच्छता के लिए तैयार करने की कोशिश है।
- राजीव रंजन मीणा, जिला पंचायत सीईओस सागर

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