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आज ही दिन हुए थे भारत के दो टुकड़े, माउंटबेटन ने किया था देश को बांटने का ऐलान

3 जून के जख्म आज भी हैं ताजा, दंगों ने ले ली थी लाखों की जान

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भोपाल. भारत को आजादी मिले 75 साल हो चुके हैं लेकिन क्या आपको पता है कि आज की तारीख यानी कि 3 जून कि यह तारीख भारत के लिए कितनी खास रखती है। आज ही की तारीख के दिन भारत के अंतिम वायसराय लॉर्ड माउंटबेटन ने देश को बांटने का ऐलान कर दिया था आज ही के दिन जब भारत का बंटवारा हुआ था। तभी से इस घटना को "3 जून की योजना" या फिर "माउंटबेटन योजना" के तौर पर जान आ गया।

आखिर क्या थी माउंटबेटन योजना
जब भारत को अंग्रेजों से आजादी मिल रही थी और वही ब्रिटिश सरकार ने भी फरवरी 1947 को भारत को आजाद करने का फैसला कर लिया था। तब उस वक्त भारत के तत्कालीन वायसराय लॉर्ड माउंटबेटन को भारत की आजादी का मानचित्र तैयार करने को कहा गया था। तब माउंटबेटन ने कांग्रेस और मुस्लिम लीग के नेताओं से लंबी बातचीत की तब 3 जून 1947 को भारत को 2 देशों में विभाजित करने की योजना को पेश किया गया। इसी योजना के आधार पर भारत को अंग्रेजों से आजादी मिली और तभी पाकिस्तान के रूप में भारत का एक बड़ा हिस्सा भारत से अलग हो गया।

माउंटबेटन योजना मानने को लेकर झगड़ा
उस वक्त इस योजना की बातचीत चल रही थी। तब देश में सांप्रदायिक दंगों में उलझ चुका था चारों तरफ दंगों का माहौल बन चुका था पाकिस्तान की मांग भी जोर पकड़ने लगी थी और हिंदू-मुस्लिम दंगों के कारण माउंटबेटन ने अपनी योजना में 2 देशों को बांटने का फैसला दिया था और जो झगड़ा हो रहा था। वह इसी मांग को पूरा करने को लेकर हो रहा था।

इस 3 जून की योजना की कुछ खास बातें
- भारत का विभाजन करके दो अलग-अलग देश बनाए जाएं एक भारत और दूसरा पाकिस्तान।
- इन दोनों देशों का अलग अलग संविधान भी होगा।
- पंजाब और बंगाल में हिंदू मुस्लिम बहुसंख्यक जिलों को अलग प्रांत बनाने का विकल्प भी होगा।

भारतीय नेताओं ने माउंटबेटन की इस योजना के आगे घुटने टेक दिए क्योंकि इसी योजना के तहत भारत को आजादी मिल रही थी और इस योजना पूर्ण रूप से ऐलान हो गया तब ब्रिटिश सरकार ने स्वतंत्रता अधिनियम के रूप 1947 को भारत को आजाद करने का फैसला दे दिया।

जब भारत के बॅटवारे की बात हो रही थी और जब लोगो से ये बोल दिया गया था की उनको पूरी आजादी है कि वो लोग जिस देश में जाना चाहते है चले जाये और तभी देश में दंगे शुरू हो गए थे तभी अधिकतर लोग भारत के कई राज्यों में आकर बस गए और वही मध्य प्रदेश के कई शहरों में भी लोग आकर बस गए थे और बाद में आए लोगों को भारत की नागिरिक्ता भी दे दी गई।