
मनीष कुशवाह. भोपाल. करीब डेढ़ साल तक स्कूल बंद रहने से बच्चों को ऑनलाइन पढ़ाई कराई गई. ऑनलाइन पढ़ाई होने से बच्चों की शैक्षणिक क्षमता प्रभावित हुई है। यही कारण है कि त्रैमासिक परीक्षा के परिणाम अपेक्षित नहीं रहे। परीक्षा सितंबर में हुई थी। इसमें दसवीं में तो ज्यादा परीक्षार्थी फेल हो गए. मुख्य परीक्षाओं से पहले आए ऐसे परिणाम ने सभी की चिंता बढ़ा दी है.
रिजल्ट के अनुसार 10 वीं में 54 प्रतिशत तो 12वीं के 31 प्रतिशत विद्यार्थी असफल रहे। इससे वार्षिक परीक्षा में अच्छे परिणाम को लेकर असमंजस है। नतीजतन स्कूल शिक्षा विभाग ने बोर्ड परीक्षाओंं की तैयारी के लिए रणनीति बनाई है। इसमें मूल्यांकन, रेमेडियल कक्षाएं, समीक्षा और कार्यशाला को शामिल किया गया है।
जानकारों के मुताबिक कोरोना के चलते मौजूदा सत्र का अधिकतर समय ऑनलाइन पढ़ाई में गया। इससे बोर्ड कक्षाओं का कोर्स तक पूरा नहीं हो सका है। कक्षा नौ से 12वीं की त्रैमासिक परीक्षाओं के परिणाम खराब आए हैं। कक्षा नौ के 62 फीसदी बच्चे तो दसवीं के 54 फीसदी बच्चे डी और ई ग्रेड में आए हैं। 11वीं के 48 फीसदी और 12वीं के 31 फीसदी बच्चों ने इन ग्रेड में स्थान पाया है।
दसवीं और 12वीं की बोर्ड परीक्षाएं 12 फरवरी से होंगी। लिहाजा तैयारियों के लिए कम समय है। इसको लेकर भी रिपोर्ट में चिंता जताई गई है।
इन तरीकों से परिणाम बेहतर करने की कवायद
रेमेडियल कक्षाएं: त्रैमासिक परीक्षाओं में सी, डी और ई ग्रेड पाने वाले 10वीं-12वीं के विद्यार्थियों के लिए नौ दिसंबर से रेमेडियल कक्षाएं लगाई जाएंगी। इसमें दो कालखंड होंगे।
मूल्यांकन: विद्यार्थियों के मूल्यांकन के लिए 29 नवंबर से अद्र्धवार्षिक और जनवरी के पहले सप्ताह में प्री बोर्ड परीक्षाएं होंगी। इनके जरिये विद्यार्थियों का लर्निंग लेवल जानने के साथ ही बोर्ड परीक्षा संबधित प्रश्नों को हल करने के प्रयास किए जाएंगे।
टिप्स एंड ट्रिक्स वर्कशॉप: ऑनलाइन और ऑफलाइन माध्यमों से बोर्ड परीक्षाओं के प्रश्न पत्र हल कराने, स्वयं अध्ययन की रणनीति बनाने में विद्यार्थियों को मदद की जाएगी। प्रदेश से जिला स्तर पर हर 15 दिन में समीक्षा बैठक होगी।
Published on:
22 Nov 2021 02:22 pm
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