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हिंदू धर्म को सबसे पुरातन धर्म माना जाता है। कहते हैं कि सृष्टि की उत्पत्ति के साथ इस धर्म की उत्पत्ति हुई है। इस धर्म के ग्रंथ,वेद-पुराण में कही गई कई बातों का शाश्वत प्रमाण भी मिलता है। इसी संदर्भ में सोना-चांदी के प्रमाण भी मिलते है। श्रीमदभागवत में लिखा है कि शिव के वीर्य से सोना-चांदी की उत्पत्ति हुई है।
ये लिखा है भागवत में
कहा जाता है शिव की रचना स्वयं भगवान ने की है। भागवत के एक प्रसंग में ये भी कहा गया है कि धरती पर जो सोना-चांदी है वो शिव के वीर्य से बना है। समुंद्र मंथन के वक़्त जब अमृत कलश निकला तो देव-दानव में अमृत को लेकर युद्ध छिड़ गया। ईश्वर चाहते थे कि अमृत देवताओं को मिले,जिससे जनकल्याण के लिए भगवान विष्णु ने मोहिनी धरा और दानवो को माया में डालकर अमृत देवताओं को पिलाया। उस रूप पर खुद शिव भी मोहित हो गए थे।
भगवान शिव द्वारा मोहिनी रूप के बारे में पूछे जाने पर विष्णु ने उन्हें इसकी सच्चाई बताने के लिए एक बार फिर वहीं रुप धरकर शिव-पार्वती और उनके गणों के सामने सुंदर उपवन में आए। तब शिव उस मोहिनी रुपी मायाजाल में फंस गए। भगवान शिव फिर उस मोहिनी के पीछे भागने लगे। बाद में द्वारा मोहिनीरुपी नारी को पकड़ने के बाद उनकी काम शक्ति बहुत तेज हो गई। लेकिन जैसे ही मोहिनी रूप धरे भगवान विष्णु ने खुद को शिव से छुड़ाया तो शिव ने उन्हें फिर पकड़ने की कोशिश की। इसी क्रम में भगवान शिव का वीर्य धरती पर गिर गया। जहां-जहां शिव का वीर्य गिरा। वहां सोना-चांदी की खान बन गई। इसलिए सोना चांदी को पवित्र और पूजनीय माना जाता है।