
राजधानी लखनऊ स्थित किंग जॉर्ज मेडिकल यूनिवर्सिटी (KGMU) से जुड़े कथित अवैध धर्मांतरण और यौन शोषण प्रकरण की जांच उत्तर प्रदेश स्पेशल टास्क फोर्स (STF) ने फिर से सक्रिय रूप से शुरू कर दी है। जांच टीम विश्वविद्यालय के संबंधित विभागों में दस्तावेज़ों और गतिविधियों की गहन पड़ताल कर रही है और जल्द ही विभागीय अधिकारियों तथा कर्मचारियों के बयान दर्ज करने की प्रक्रिया आगे बढ़ाई जाएगी। सूत्रों का कहना है कि पैथोलॉजी और क्रिटिकल केयर मेडिसिन विभाग के HODs को नोटिस भेजने का निर्णय लिया गया है, वहीं दोनों विभागों के डॉक्टरों व कर्मचारियों के मोबाइल नंबरों सहित अन्य महत्वपूर्ण जानकारी भी STF अपने कब्जे में ले चुकी है। एजेंसी इनसे बयान लेकर मामले की हर संभावित कड़ी की पुष्टि करने में जुटी है।
मुख्य आरोपी डॉ. रमीज मलिक के आगरा कनेक्शन की भी समानांतर जांच चल रही है, जहां उनके पुराने सहयोगियों और ‘इस्लामिक मेडिकोज’ नामक व्हाट्सएप ग्रुप से जुड़े लोगों की पहचान की जा रही है। STF इस ग्रुप के एडमिन और सदस्यों से पूछताछ की तैयारी में है, क्योंकि यह ग्रुप मेडिकल छात्रों में धार्मिक गतिविधियों और संभावित नेटवर्क को बढ़ावा देने से जुड़ा हुआ बताया जा रहा है।
बीते शुक्रवार को STF की टीम KGMU पहुंची और फैक्ट-फाइंडिंग कमेटी की 160 पन्नों की रिपोर्ट प्राप्त की, जिसे कमेटी प्रमुख एवं विश्वविद्यालय प्रवक्ता डॉ. केके सिंह ने सौंपा। रिपोर्ट के विभिन्न बिंदुओं का अध्ययन शुरू हो गया है, साथ ही विश्वविद्यालय की अन्य जांच रिपोर्टें भी STF की स्कैनिंग में शामिल हैं।
यह मामला बीते महीने तब उजागर हुआ जब एक महिला रेजिडेंट डॉक्टर ने आरोपी डॉ. रमीज पर यौन उत्पीड़न, जबरन गर्भपात कराने और धर्म परिवर्तन के दबाव जैसे गंभीर आरोप लगाए। आरोपी वर्तमान में जेल में बंद है और STF जल्द ही उससे पूछताछ करने की तैयारी में है। जांच एजेंसी इस पूरे मामले को एक बड़े संगठित नेटवर्क से जुड़ा मान रही है और अधिकारियों का कहना है कि सबूतों के आधार पर आगे की कार्रवाई तेज की जाएगी। मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए जांच गोपनीय और निष्पक्ष तरीके से जारी है और आगे कई अहम खुलासे सामने आने की संभावना जताई जा रही है।
Updated on:
19 Jan 2026 05:53 pm
Published on:
19 Jan 2026 05:37 pm
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