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अफसरों की मनमानी शर्तों से छोटी नर्सरियां बाहर

नर्मदा किनारे लगाने के लिए खरीदना है सवा दो करोड़ पौधे

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narmada river

भोपाल. उद्यानिकी विभाग ने नर्मदा किनारे जुलाई में रोपे जाने वाले पौधों के टेंडर डॉक्यूमेंट (ड्रॉफ्ट) की शर्तें तीन बार बदलीं। तीसरी बार जोड़ी गई शर्तें ऐसी हैं कि सरकार की अनुदान प्राप्त नर्सरी भी टेंडर में हिस्सा नहीं ले सकेंगी। इससे उन्हें नुकसान होगा। इसे लेकर अफसरों में मतभेद शुरू हो गया है। कुछ अफसरों का कहना है कि सरकार का प्रयास स्वरोजगार और लघु उद्यम को बढ़ावा देने का है।

छोटी नर्सरियों को टेंडर प्रक्रिया से बाहर करना सरकार की इस मंशा के विपरीत होगा। विभाग को २.२५ करोड़ पौधे खरीदना है। विभाग के ही अन्य अफसरों का मानना है कि छोटी नर्सरियों से कम संख्या में पौधे खरीदने पर उनकी गणना और भुगतान का काम बढ़ जाएगा। इससे बचने के लिए ऐसी शर्तें जोड़ी गई कि छोटी नर्सरी टेंडर प्रक्रिया से पहले ही बाहर हो जाएं।

- नफे-नुकसान का गणित
प्रदेश की करीब १६०० नर्सरी टेंडर नहीं भर सकेंगी। बड़ी नर्सरियां ज्वाइंट वेंचर के जरिए मार्केट से पौधे खरीदकर उद्यानिकी विभाग को देंगी। इससे ज्वाइंट वेंचर वाली नर्सरियों को फायदा होगा।

ट्रेडर्स ही डाल सकेंगे टेंडर
टेंडर ड्रॉफ्ट में 10 लाख की ईएमडी, तीन साल में 10 लाख पौधे उगाने और लगाने का अनुभव जैसी शर्तों के कारण ट्रेडर्स ही टेंडर डाल सकेंगे। विभागीय अफसर यह भी कह रहे हैं कि प्रदेश में ऐसी कोई नर्सरी नहीं है, जो इतनी बड़ी संख्या में पौधे एक दिन में भेज सके। पौधे इतनी जल्दी तैयार भी नहीं होंगे। फलदार पौधे तैयार होने में एक से दो साल का समय लगता है।

दिल्ली से खरीदे थे पौधे
उद्यानिकी विभाग ने पिछले साल करीब 40 लाख पौधे खरीदे थे। इनमें से ज्यादातर पौधे दिल्ली की नेशनल एग्रीकल्चर को-ऑपरेटिव फेडरेशन (नेकॉफ) ने सप्लाइ किए थे। इस बार भी इसी संस्था को ध्यान में रखकर टेंडर तैयार करना बताया जा रहा है।

क्या थी शर्तें
1 ड्रॉफ्ट - नर्सरी संचालक अपने राज्य के नर्सरी एक्ट के तहत रजिस्टर्ड हो। अपनी नर्सरी में उपलब्ध पौधों की संख्या के आधार पर टेंडर में भाग ले सकेंगे।
2 ड्रॉफ्ट - 50 हजार रुपए ईएमडी। वर्क ऑर्डर के 45 दिन के भीतर सप्लाइ करना होगा।
3 ड्रॉफ्ट - पौधे सप्लाइ के 10 दिन जिंदा रहना चाहिए। नर्सरी ने तीन साल में 10 लाख पौधे का व्यापार किया हो। 10 लाख रुपए की ईएमडी।

हमने जानबूझकर ऐसी शर्तें जोड़ी हैं कि छोटी नर्सरी वाला आ ही नहीं पाए। तीन-चार हजार पौधे वाले भी हिस्सा लेंगे तो हमारा काम बढ़ जाएगा। हम बड़े प्लेयर को हम लाना चाहते हैं। छोटी नर्सरी वालों के पास इतने पौधे हो भी नहीं सकते। पिछले साल नेकॉफ से पौधे खरीदे थे।
- सत्यानंद, संचालक, उद्यानिकी विभाग

रिपोर्ट - राधेश्याम दांगी,