5 फ़रवरी 2026,

गुरुवार

Patrika Logo
Switch to English
home_icon

मेरी खबर

video_icon

शॉर्ट्स

epaper_icon

ई-पेपर

इस तारीख को फैमिली के साथ फिल्म देखने न जाए, दर्शकों का देखते ही मुंह काला करने के आदेश!

करणी सेना और राजपूत समाज की धमकी के बाद मध्यप्रदेश में भी टेंशन बढ़ गया है, प्रशासन तो अपनी तैयारी रखेंगा, दर्शकों को भी सतर्क...।

2 min read
Google source verification

भोपाल

image

Manish Geete

Jan 19, 2018

padmavat


भोपाल। सुप्रीम कोर्ट से पद्मावत फिल्म के प्रदर्शन को हरी झंडी मिलने के बाद राजपूत समाज और इससे जुड़े संगठनों ने इस फिल्म के विरोध के लिए कमर कस ली है। संगठनों के पदाधिकारियों ने चेतावनी दी है कि शहर सहित प्रदेश के टॉकीजों में इस फिल्म का अगर प्रदर्शन किया गया, तो इस दौरान होने वाली अप्रिय घटना के लिए स्वयं टॉकीज संचालक और फिल्म देखने वाले दर्शक जिम्मेदार रहेंगे।

सरकार ने नहीं किया कोई फैसला

इधर मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने शुक्रवार को कहा कि फिलहाल सुप्रीम कोर्ट के फैसले की कापी का अध्ययन किया जा रहा है। फिलहाल आगे क्या किया जाएगा, उस पर निर्णय नहीं किया गया है। सुप्रीम कोर्ट के फैसले से पहले मुख्यमंत्री ने कहा था कि मध्यप्रदेश में पद्मावती बैन रहेगी, जो कहा है वो होगा।

फिल्म के निर्माण से आठ करोड़ लोगों की भावना आहत हुई
सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद शाम को करणी सेना के कार्यकर्ता राजपूत समाज के लोगों के साथ ईश्वर नगर स्थित राजपूत ग्राउंड में जुटे। इस दौरान उन्होंने इस फिल्म को लेकर अपना रोष प्रकट किया। करणी सेना महानगर अध्यक्ष सुरेंद्र सिंह चौहान ने बताया कि हम कोर्ट की अवमानना नहीं करेंगे, लेकिन इस फिल्म के निर्माण से देश के आठ करोड़ राजपूतों की भावना आहत हुई है, इसलिए हम फिल्म का प्रदर्शन नहीं होने देंगे। अगर शहर में फिल्म का प्रदर्शन होता हैं, तो उग्र आंदोलन करेंगे, टॉकीजों को जलाएंगे और फिल्म देखने वालों का मुंह काला करेंगे। उन्होंने बताया कि शहर में करणी सेना से तकरीबन १७०० युवा जुड़े हुए हैं और हम किसी भी कीमत पर शहर में इसका प्रदर्शन नहीं होने देंगे।

बैठक कर बनाएंगे आंदोलन की रणनीति
मप्र राजपूत समाज के महासचिव दीपक चौहान ने कहा कि यह सुप्रीम कोर्ट का निर्णय है, लेकिन इससे जनभावनाएं भी जुड़ी हुई हंै। इसे लेकर हम दो तीन दिन में समाज की एक बैठक करेंगे,और चर्चा करेंगे, कि आगे हमें क्या करना है। इसके बाद आंदोलन की रूपरेखा तैयार की जाएगी।

चुनाव में सरकार को सबक सिखाएंगे
क्षत्रिय महासभा के संभागीय अध्यक्ष कुंवर चेतन सिंह चंदेल ने कहा कि हम सुप्रीम कोर्ट की अवहेलना नहीं कर सकते, लेकिन इस फिल्म का प्रदर्शन होना हमारे स्वाभिमान के साथ खिलवाड़ है और आने वाले चुनावों में हम सरकार को सबक सिखाएंगे।

पहले समझाइश, फिर होगा उग्र प्रदर्शन
महाराणा सेना के उपाध्यक्ष बंटी राजपूत ने कहा कि इस फिल्म का प्रदर्शन नहीं होने दिया जाएगा। इसके विरोध में हम पहले भी आंदोलन कर चुके हैं, क्योंकि इसमें गौरवशाली राजपूत इतिहास को तोड़ मरोड़कर पेश किया गया है। पहले हम केंद्र सरकार, राज्य सरकार, कलेक्टर आदि को ज्ञापन देंगे, शांतिपूर्ण प्रदर्शन करेंगे। इसके बाद भी अगर इसका प्रदर्शन होता हैं, तो आखिर में हमारे पास उग्र आंदोलन के अलावा कोई विकल्प नहीं बचेगा। इसके तहत जिस टॉकीज में फिल्म का प्रदर्शन होगा, उसे आग के हवाले किया जाएगा।

जारी रखेंगे विरोध
संस्कृति बचाओ मंच के प्रदेश अध्यक्ष चंद्रशेखर तिवारी ने कहा कि हम सुप्रीम कोर्ट का सम्मान करते हैं, लेकिन सुप्रीम कोर्ट को भी जनभावनाओं को ध्यान में रखते हुए कोई निर्णय देना चाहिए। फिल्म का नाम बदला है, बाकि कुछ नहीं बदला, इसलिए पूर्व में जिस तरह का विरोध था, वैसे ही विरोध जारी रखेंगे और फिल्म का प्रदर्शन नहीं होने देंगे।