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1 मिनट में 700 पान मसाला पाउच की पैकिंग करने वाली हाईटेक मशीनें, 500 करोड़ टैक्स भरा था बीते साल

स्टेट जीएसटी ने मालिक कमलकांत चौरसिया को समन जारी कर आज पेश होने के लिए बुलाया

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pan masala

shocking news: रामगंजमंडी में पान मसाले की कीमत एक करोड़, कैसे पढि़ए खबर

भोपाल। कमला पसंद और राजश्री पान मसाला-गुटखा कंपनी के यहां ईओडब्ल्यू सहित 7 विभागों ने एक साथ छापा डाला तो चौंकाने वाले तथ्य सामने आए। कंपनी के चार मंजिला भवन में हर माले पर आधुनिक मशीनें लगी हैं और बीते सात साल से उद्योग विभाग का यहां कभी निरीक्षण नहीं किया गया। इस दौरान यहां न सिर्फ मशीनों की संख्या बढ़ती गई, बल्कि आधुनिक मशीनें लगाई। छापे में टीम को जानकारी मिली है कि एक मशीन एक मिनट में 700 पान मसाला-गुटखा के पाउच पैक करने की क्षमता वाली करीब 10 मशीनें हैं और राउंड द क्लॉक यहां काम चलता है।

अलग-अलग शिफ्टों में 200 कर्मचारियों के यहां काम करने की प्राथमिक सूचना जांच एजेंसियों को मिली है। लेकिन यहां कितने कर्मचारी विधिवत काम कर रहे इसकी स्थानीय पुलिस को कभी सूचना नहीं दी गई। 40 श्रमिक तो सिर्फ पैकिंग पाऊच ट्रकों में लोड करने के लिए एक शिफ्ट में लगाए जाते थे। फैक्ट्री परिसर में ही इलेक्ट्रॉनिक तौल कांटा है, जहां गाडिय़ों का वजन होता था। स्टेट जीएसटी और ईओडब्ल्यू के अफसरों के अनुसार पिछले साल 500 करोड़ रुपए जीएसटी /टैक्स भरा था। आधुनिक मशीनों के कारण यहां जितना उत्पादन दिखाया गया उससे कई गुना अधिक पान मसाला बाजार में उतारा जा रहा था। स्टेट जीएसटी ने कानपुर निवासी फैक्ट्री संचालक कमलकांत चौरसिया को समन जारी कर सोमवार को पेश होने को कहा है।

सुरक्षा के लिए बार बड वायर

बाहरी सुरक्षा के लिए फैक्ट्री में बार बड वायर की फेंसिंग कर रखी है। अमूमन यह वायर सीमाओं पर फेंसिंग में इस्तेमाल किया जाता है। लेकिन फैक्ट्री के अंदर जहां मशीनें स्थापित है और अतिरिक्त उत्पादन किया जाता था, वहां सीसीटीवी आदि नहीं है। बाहर कैमरे लगा रखे हैं। हर फ्लोर पर अलग-अलग राज्यों के श्रमिक काम करते थे।
पीएफ को लेकर भी हो सकती है कार्रवाई

पान मसाला के फाइनल स्टेज पर उप्र और बिहार के कर्मचारियों को कमान सौंप रखी थी, जबकि कच्चे माल वाली जगह कश्मीर और उत्तर भारत के अन्य राज्यों के कर्मचारी काम करते थे। बताया जा रहा है कि 200 कर्मचारियों में से मप्र मूल के कोई भी कर्मचारियों को रोजगार नहीं दे रखा था। जबकि मप्र में स्थापित औद्योगिक ईकाईयों को मप्र के बेरोजगारों को रोजगार देने का प्रावधान है। यही नहीं अब इस मामले में कर्मचारी भविष्य निधि विभाग भी कार्रवाई कर सकता है। जांच एजेंसियों ने कर्मचारी भविष्य निधि विभाग से पीएफ आदि की भी जानकारी मांगी है, ताकि वास्तविक जानकारी मिल सके।