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पंचायतों में होगी सड़क, नाली, खरंजा निर्माण की जांच, कहीं नकली सीमेंट से निर्माण तो नहीं कराया

- सीईओ जिला पंचायत ने दिए जांच के निर्देश, मामला परवाखेड़ा में नकली सीमेंट फैक्ट्री बनाने को लेकर

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प्रभारी मंत्री से हुई पंचायत की शिकायत चार विभाग के अधिकारी पहुंचे जांच करने

प्रभारी मंत्री से हुई पंचायत की शिकायत चार विभाग के अधिकारी पहुंचे जांच करने

भोपाल। परवाखेड़ा में पकड़ी गई नकली सीमेंट बनाने की फैक्ट्री की जांच की आंच फंदा क्लॉक की उन पंचायतों तक पहंंच गईं हैं जहां-जहां निर्माण कार्य हाल ही में हुए हैं या चल रहे हैं। पंचायत चुनावों को ध्यान में रखते हुए वर्तमान में फंदा की लगभग 77 पंचायतों में निर्माण कार्य चल रहे हैं। ऐसे में फंदा ब्लॉक की लगभग सभी पंचायतें जांच के घेरे में आ गईं हैं। इन पंचायतों में आरसीसी सड़क, नाली, खरंजों, आंगनवाड़ी केंद्र, सामुदायिक भवन, मांगलिक भवन सहित अन्य निर्माण हुए हैं। खजूरी राताताल के सरपंच विनय सिंह अहिरवार ने अपनी पंचायत में बनवाई सीसी सड़क में इसी सीमेंट का इस्तेमाल किया था। फैक्ट्री पकड़े जाने से पहले सरपंच 50 बोरी सीमेंट लेकर गया था। इस आधार पर सीईओ जिला पंचायत सतीश कुमार ने जांच शुरू कराई है।

पुराने जमे हुए सीमेंट और क्रेशर से निकली डस्ट को मिलाकर मास्टर माइंड कदीर व अन्य सहयोगी नकली सीमेंट बनाते हैं। पंचायतों में हो रहे निर्माण कार्य इसे खपाने का बड़ा केंद्र बना हुआ है। जनकार बताते हैं कि खराब हुआ सीमेंट और क्रेशर की डस्ट से जो सीमेंट बनता है उसकी पकड़ काफी कमजोर होती है। महीने दो महीने में ही निर्माण उखडऩे लगता है। ऐसे में शासन का करोड़ों रुपए का बजट भी बेकार जाता है। जिला पंचायत की बैठक में कई बार घटिया निर्माण कार्यों की शिकायतें हुईं हैं, लेकिन कभी निर्माण सामग्री पर सवालिया निशान नहीं लगे। पहली बार सड़क में घटिया सीमेंट उपयोग का खुलासा पुलिस ने किया है।

ऐसे चलती है निर्माण कार्य की प्रक्रिया

ग्राम पंचायत में कहीं भी सीसी रोड, नाली, खरंजा, सामुदायिक भवन या अन्य निर्माण किए जाते हैं तो उसका प्रस्ताव बनाकर ग्रामीण यांत्रिकी सेवा (आरईएस) को भेजा जाता है। इसके बाद विभाग का इंजीनियर मौके पर जाकर खर्चे का ब्यौरा तैयार करता है। जिसकी प्रशासकीय स्वीकृति पंचायत और तकनीकी स्वीकृति आरईएस देता है। इसकी जांच की जिम्मेदारी भी विभाग की होती है, लेकिन कोई देखने नहीं जाता। इसी का फायदा उठाकर मनमाने काम होते हैं।

इन निधियों से होता है निर्माण

पंचायत में सांसद निधि, विधायक निधि, मनरेगा, 14 वे वित्त आयोग, परफोर्मेंस ग्रांट, मूलभूत बजट के रुपयों से करोड़ों के काम होते हैं। इसी बजट में से हेराफेरी की जाती है। सरपंच, पंचायत में 25 लाख तक निर्माण कार्य करा सकता है।