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धीरेंद्र शास्त्री का छलका दर्द, कहा- हम गरीब थे, फटे कपड़े पहनकर चले जाते तो…

हनुमंत कथा के दौरान पंडित धीरेंद्र शास्त्री अपने पुराने दिन को याद करते हुए काफी भावुक हो गए। उन्होंने कहा कि हमारे पिता को कोई भी शादी में नहीं बुलाता था। परिवार वाले शादी के कार्ड में मेरे पिता का नाम तक नहीं लिखते थे।

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Pandit Dheerendra Shastri

Pandit Dheerendra Shastri

Pandit Dhirendra Shastri :मध्यप्रदेश के बागेश्वर धाम(Baba Bageshwar) के पीठाधीश्वर पंडित धीरेंद्र शास्त्री देशभर में कथावाचन करते है। इस समय बाबा बागेश्वर बिहार के गोपालगंज में कथावाचन कर रहे हैं। गोपालगंज के रामजानकी मठ में धीरेंद्र शास्त्री के हनुमंत कथा(Hanumnt Katha) का आज यानि शनिवार को तीसरा दिन है। आज ये यहां दिव्य दरबार लगाएंगे। बता दें कि धीरेंद्र शास्त्री अक्सर अपने बयानों के चलते सुर्खियों में बने रहते हैं। एक बार फिर इनके बयान की चर्चा तेज हो गई है। हलांकि इस बार धीरेंद्र शास्त्री ने अपने पुराने दिनों को याद करते हुए कई बाते कहीं। साथ ही हजारों-लाखों लोगों के सामने शायरी भी सुनाया।

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पुराने दिन याद कर भावुक हुए धीरेंद्र शास्त्री

हनुमंत कथा के दौरान पंडित धीरेंद्र शास्त्री(Pandit Dhirendra Shastri) अपने पुराने दिन को याद करते हुए काफी भावुक हो गए। उन्होंने कहा कि हमारे पिता को कोई भी शादी में नहीं बुलाता था। परिवार वाले शादी के कार्ड में मेरे पिता का नाम तक नहीं लिखते थे। क्योंकि हम गरीब थे। फटे कपड़े पहनकर चले जाते तो उनकी इज्जत चली जाती। इतने के बाद भी मेरी मां कहती थी कि तुम राम को मत छोड़ना, हमारे अच्छे दिन भी आएंगे।'

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बाबा बागेश्वर की शायरी

वहीं धीरेंद्र शास्त्री(Pandit Dhirendra Shastri) ने आगे कहा कि, दुनिया में उसी को इज्जत मिलती है जो फेमस, अमीर या नेता होते हैं। साधारण व्यक्ति को कोई नहीं पूछता। गरीब तो सिर्फ ताली बजाने के लिए होते है। ये दिन हमने अपनी आंखों से देखा है, गरीब के सिर्फ परमात्मा होते है।' इस दौरान बाबा बागेश्वर ने एक शायरी भी सुनाई। उन्होंने कहा-'मुझे कौन पूछता था तेरी बंदगी से पहले, मैं खुद को ढूंढता था इस जिंदगी से पहले।'

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