3 जनवरी 2026,

शनिवार

Patrika LogoSwitch to English
home_icon

मेरी खबर

icon

प्लस

video_icon

शॉर्ट्स

epaper_icon

ई-पेपर

डिंडोरी में राशन बड़ा मुद्दा, पानी पर भी छिड़ा संग्राम

योजनाओं का लाभ न मिलने से लोगों में गुस्सा

2 min read
Google source verification
Patrika: Ground Report of Dindori District

Patrika: Ground Report of Dindori District

भोपाल. बैगा आदिवासियों के क्षेत्र डिंडोरी में चुनाव का असर नजर आने लगा है। जिले के दूर-दराज के गांवों में इक्का-दुक्का नेता हाथ जोड़े दिखाई देने लगे हैं। ये नेता टिकट के दावेदार नहीं, बल्कि दावेदारों के समर्थक हैं। इनसे पूछा तो बोले कि नेताजी टिकट के लिए बड़े नेता के पीछे हैं और हम जनता के पीछे।

भरभई गांव के सोबित सिंह मरावी कहते हैं, 9 महीने से उन्हें तेल-शक्कर नहीं मिली है। तीन माह से सस्ते गेंहू-चावल के लिए परेशान हैं। जब सोसाइटी जाओ तो बोल देते हैं, अभी राशन नहीं आया, बाद में आना। यही कहानी यहां के सुखलाल की है। उनका कहना है कि राशन नहीं मिलेगा तो कैसे जीएंगे। इस बार ठान कर बैठे हैं, समय पर सस्ता राशन मिलेगा तो ही वोट डालेंगे। धरमू सिंह बोले, राशन देने वाले विभाग के मंत्री तो हमारे बीच के धुर्वे ही हैं, क्या उन्हें नहीं पता कि यहां राशन की दुकानों के क्या हाल हैं।

यहां से आगे गोपालपुर गांव है। गांव में उपसरपंच गिरवर मरावी छोटी सी दुकान चलाते हैं। दुकान पर आईं गुजरी बाई को चुनाव से कोई उम्मीद नहीं, उन्हें लगता ही नहीं कि कुछ बेहतर होगा। वो कहती हैं कि सरकार ने कहा था कि बैगा आदिवासी महिलाओं को एक हजार रुपए महीने देंगे, लेकिन आज तक एक पैसा भी नहीं मिला।

उपसरपंच गिरवर मरावी हमें गांव के अंदर टॉयलेट की स्थिति दिखाने ले गए। मौके पर खुदे गड्ढे में गिरकर एक आदिवासी महिला की मौत हो चुकी है। मृतका के पति गोपसिंह ने कहा कि शौचालय तो बना नहीं, पत्नी मर गई।

गांव के मुकद्दम सुखदेव सिंह के खेत में पिछले दिनों बोरी बंधान हुआ था, जिसके उन्हें 72 हजार रुपए मिलना थे, लेकिन उन समेत चार लोगों को महीनों बीतने के बाद भी पैसे नहीं मिले हैं। जिले के समनापुर विकासखंड के कंचनपुर, बुदरुखी समेत दर्जन भर गांव की महिलाएं सिर पर लकड़ी की गठरी बांधकर शहर की ओर जाते हुए देखी जा सकती हैं। विकास क्या होता है, उन्हें नहीं पता। यहां पीने के पानी की भी बड़ी समस्या है।

वहीं आदिवासी इलाकों में मनरेगा की मजदूरी वक्त पर न मिलना बड़ा मुद्दा है। रतिया बाई ने दो टूक कहा कि इस बार घर के सामने हैंडपम्प लगेगा, तभी वोट डालेगा, जो लगाएगा वोट भी उसी को जाएगा।