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शहर के लोग आरओ वाटर के नाम पर पी रहे हैं सिर्फ फिल्टर किया ठंडा पानी

शहर में कई जगहों पर अवैध रूप से ठंडा पानी बेचने का कारोबार किया जा रहा है। बगैर लाइसेंस के पानी का कारोबार कर लोगों के स्वास्थ्य से खिलवाड़ करने वालों पर जिम्मेदार विभाग कोई कार्रवाई भी नहीं कर रहा है।

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बगैर लाइसेंस के चल रहा शहर में ठंडे पानी का कारोबार

cold water business running without license

बैतूल। शहर में कई जगहों पर अवैध रूप से ठंडा पानी बेचने का कारोबार किया जा रहा है। बगैर लाइसेंस के पानी का कारोबार कर लोगों के स्वास्थ्य से खिलवाड़ करने वालों पर जिम्मेदार विभाग कोई कार्रवाई भी नहीं कर रहा है। कार्रवाई को लेकर कहा जाता है कि हमारे पास जांच का अधिकार नहीं है। हम सिर्फ उन्हीं स्थानों की जांच कर सकते है, जिनके पास पानी का पाउच व बोतल में पानी पैक करने का लाइसेंस है।पत्रिका ने जब शहर में संचालित आरओ वॉटर सप्लायरों के यहां पड़ताल की तो पता चला कि किसी के पास लाइसेंस मौजदू नहीं हैं और जो पानी केनों में भरकर सप्लाई किया जाता है उसकी जांच भी नहीं कराई जाती है। जबकि पानी की अकेले 21 प्रकार की जांच पीएचई की लैब में की जाती है। बता दें कि जिलेभर में सिर्फ 50 से अधिक जगहों पर ठंडा पानी बेचने का कारोबार किया जा रहा है।

शहर भर में वाहनों से सप्लाई कर रहे पानी
शहर के मुर्गी चौक स्थित नगरपालिका के माध्यम से संचालित जीवन धारा योजना का संचालन प्रथमेश इंटरप्राइजेस कंपनी कर रही हैं।पत्रिका ने जब इस प्लांट पर पहुंचकर पड़ताल की तो सामने आया कि विगत दो-तीन महीनों से बोर और आरओ वॉटर की पीएचई लैब से जांच ही नहीं कराई गई है। पानी के सैंपल की जो जांच रिपोर्ट बताई जा रही थी वह वर्ष 2022 अक्टूबर माह की थी। वर्ष 2023 में जांच रिपोर्ट के बारे में पूछा गया तो बताया सर अपने साथ ले गए हैं। पुरानी जांच रिपोर्ट में भी पानी की पीएच मान भी 5.9 बताया गया है। जबकि पीएच मान 6.8 से 8.5 के बीच होना चाहिए। जो पानी सप्लाई किया जा रहा है वह क्षारीय है। जबकि जीवन धारा योजना के तहत पूरे शहर में वाहनों के माध्यम से डोर-टू-डोर जाकर पीने के पानी की सप्लाई की जा रही है।

जलस्तर गिरते ही बढ़ेगी आरओ वॉटर की डिमांड
गत वर्ष अच्छी बारिश होने से फिलहाल जिले में वॉटर लेवल की स्थिति बेहतर हैं। पीएचई के आंकड़ों के मुताबिक 1 मार्च की स्थिति में जिले का वॉटर लेबल 18.84 मीटर पर मौजूद हैं, लेकिन जैसे-जैसे गर्मी बढ़ेगी, वॉटर लेवल भी तेजी से नीचे की ओर गिरेगा। इसके साथ ही आरओ वॉटर का कारोबार भी तेजी से बढऩा शुरू हो जाता है। हालांकि आज कल साल भर आरओ वॉटर की सप्लाई होती हैं लेकिन गर्मी के दिनों में पानी की खपत दोगुनी हो जाती है। ऐसे में आरओ वॉटर संचालक आमतौर पर केन में पानी भर कर सप्लाई कर देते हैं। केन में मौजूद पानी पीने योग्य है या नहीं इसकी जांच तक नहीं कराई जाती है। जबकि नियमानुसार रॉ वॉटर सहित आरओ वॉटर की हर महीने पीएचई की प्रयोगशाला में भेजकर जांच कराई जाना जरूरी होता है।

घरों में संचालित हो रहे आरओ वॉटर प्लांट
शहर में कई जगहों पर लोग घरों के अंदर ही आरटो वॉटर प्लांट संचालित कर रहे हैं। जहां पर्याप्त जगह तक मौजूद नहीं होती हैं।साफ-सफाई का भी अभाव रहता है। ऐसे में जो पानी आरओ के नाम पर सप्लाई किया जाता है उसकी गुणवत्ता को लेकर ही सवाल खड़े हो जाते हैं। बताया गया कि शहर में जितने भी आरओ वॉटर प्लांट संचालित हो रहे हैं उनमें से किसी के पास लाइसेंस नहीं हैं। जिम्मेदार विभाग भी इससे पल्ला झाड़ रहे हैं। सिर्फ पानी ठंडा कर सीधे केनों में भरकर बेचा जा रहा है। जो पानी सप्लाई किया जाता हैं उसकी टेस्टिंग भी नहीं कराई जाती है।नियमानुसार यदि पानी का कमर्शियल उपयोग किया जा रहा हैं तो रॉ वॉटर जिसका इस्तेमाल पीने के लिए किया जाता है उसकी भौतिकी, रासायनिक और जीवाणु परीक्षण जांच कराया जाना अनिवार्य होता है।

पैसे बचाने के चक्कर में नहीं कराते जांच
पीएचई लैब में पानी की जांच कोई भी करा सकता है। जांच के लिए निर्धारित शुल्क भी तय है। आम जनता से 600 रुपए और व्यवसायिक उपयोग वालों से1550 रुपए लिए जाते हैं। महीने में एक बार रॉ वॉटर और सप्लाई वॉटर की जांच कराई जाना आवश्यक होता हैं, लेकिन पैसे बचाने के चक्कर में आरओ संचालक पानी की नियमित जांच ही नहीं कराते है। जबकि गर्मी शुरू होने से पहले और बारिश के बाद पानी की जांच कराई जाना जरूरी होता है, क्योंकि इस दौरान ग्राउंड वॉटर तेजी से नीचे जाता है जिसके कारण पानी में कई प्रकार के कैमिकल आते हैं।
इनका कहना
- हम सिर्फ सील पैक या बोतल बंद पानी की जांच ही कर सकते हैं। हमारे पास खुले पानी की जांच का अधिकार नहीं है। इन्हें लाइसेंस भी हमारे माध्यम से जारी नहीं किया जाता है।
- संदीप पाटिल, फूड इंस्पेक्टर जिला खाद्य एवं औषधि प्रशासन विभाग बैतूल।
- प्रथमेश इंटरप्राईजेस ने अक्टूबर 2022में पानी की जांच कराई थी। पानी की जांच में पीएच 5.9 आया था। उसके बाद से अभी तक पानी की जांच नहीं कराई गई है। नियमानुसार हर महीने रॉ वाटर और सप्लाई वॉटर की जांच कराई जाना चाहिए। वहीं निजी आरओ प्लांट संचालकों ने तो आज तक पानी का सैंपल तक चेक नहीं कराया है।

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