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बैठक : पेट्रोल – डीजल में वृद्धि के बाद सरकार पर बना रहे दबाव.. देखें पूरा मामला!

बस ऑपरेटर्स बोले- किराया भी बढ़ाओ

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भोपाल। तीन साल बाद हुई किराया बोर्ड की बैठक में अधिकारियों के साथ 25 फीसदी वृद्धि का प्रस्ताव लागू नहीं होने के बाद बस ऑपरेटर्स ने सरकार पर दबाव बढ़ा दिया है। ऑपरेटर्स का तर्क है कि बोर्ड बैठक के बाद से ही डीजल के दामों में सात रुपए की वृद्धि हो चुकी है, इसलिए नए सिरे से और बढ़ोतरी का प्रस्ताव बनाया जाए।

वहीं चुनावी साल में जनता के ऊपर बोझ डालने से बच रही सरकार किराया बढ़ाने का निर्णय नहीं ले पा रही है। जानकारों का कहना है कि यदि पेट्रोल-डीजल के दामों में इसी तरह वृद्धि होती रही तो ऑपरेटर्स के दबाव में परिवहन विभाग 20 पैसे प्रति किलोमीटर तक बढ़ोतरी की नई दरें जारी कर सकता है, इसकी सीधी मार आम जनता पर पड़ेगी।

प्रदेश में वर्तमान में साधारण बसों का किराया 92 पैसे प्रति किलोमीटर निर्धारित है। किराया बोर्ड के सदस्य चरणजीत सिंह गुलाटी ने बताया कि इससे पूर्व 2015 में किराया समिति की बैठक हुई थी। इस बार किराया 21 मार्च को हुई बैठक में परिवहन विभाग के प्रमुख सचिव, परिवहन आयुक्त सहित सामान्य प्रशासन, वित्त सहित और वैट टैक्स के अधिकारी शामिल हुए।

ऑपरेटर्स की 40 पैसे प्रति किमी की मांग की नकारते हुए बोर्ड ने 25 पैसे प्रति किलो वृद्धि की अनुशंसा परिवहन मंत्री के पास भेजी थी। सामान्यत: किराया बोर्ड के प्रस्तावों को एक पखवाड़े में लागू कर दिया जाता है। एक महीने से अधिक बीतने पर भी सरकार इस पर कोई निर्णय नहीं ले सकी।

खास बात यह है कि बोर्ड की अनुशंसा के बाद से डीजल के रेट में सात रुपए प्रति लीटर से अधिक की वृद्धि हो चुकी है इसके चलते ऑपरेटर दबाव बना रहे हैं। इसके चलते यदि 20 पैसे किलोमीटर की वृद्धि भी हुई तो बसों के किराए में 5 रुपए से लेकर 100 रुपए तक का अंतर आ जाएगा। जैसे भोपाल से इंदौर का किराया ही 40 रुपए बढ़ जाएगा।

कांग्रेस ने वाहन ठेले पर रखकर निकाला जुलूस

केंद्र में जब यूपीए सरकार ने पेट्रोलियम पदार्थों के दाम बढ़ाए थे तो मुख्यमंत्री साइकिल लेकर वल्लभ भवन पहुंच गए थे, लेकिन अब भाजपा सरकार में पेट्रोल 80 रुपए लीटर बिक रहा है फिर भी प्रदेश सरकार चुप है। जिला कांग्रेस कमेटी ने बुधवार को 6 नंबर मार्केट में विरोध प्रदर्शन किया। जिलाध्यक्ष पीसी शर्मा, योगेंद्र सिंह चौहान, अविनाश कड़बे सहित दर्जन भर कांग्रेस नेताओं ने वाहनों को ठेले पर रखकर केंद्र सरकार के खिलाफ नारेबाजी की। शर्मा ने कहा कि केंद्र और राज्य की सरकारों ने जनहित के मुद्दों को प्राइवेट कंपनियों के हवाले कर दिया है।

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