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पीएचडी छात्रों के लिए बड़ी खुशखबरी! थीसिस में कुछ नया बनाया तो मिलेगा खास लाभ

MP News: अब केवल जर्नल पेपर नहीं, बल्कि पेटेंट और टेक्नोलॉजी ट्रांसफर को भी समान महत्व मिलेगा, जिससे शोध सीधे उद्योग और रोजगार से जुड़ेगा।

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भोपाल

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Akash Dewani

Feb 23, 2026

PhD students will earn special benefits create something new in thesis bhopal mp news

PhD students will earn special benefits (फोटो- Patrika.com)

MP News:भोपाल स्थित मौलाना आजाद राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान (मैनिट) ने शोध व्यवस्था में बड़ा बदलाव किया है। अब संस्थान ने तय किया है कि पीएचडी शोध के परिणामों को केवल जर्नल में प्रकाशित पेपर तक सीमित नहीं रखा जाएगा, बल्कि पेटेंट और टेक्नोलॉजी ट्रांसफर को भी समान महत्व दिया जाएगा। यानी उनकी बनाई तकनीक उद्योगों तक पहुंचती है, तो उसे भी उतना ही महत्व मिलेगा। यह निर्णय मैनिट की सीनेट बैठक में लिया गया।

तीन साल से पहले भी जमा हो सकेगा थीसिस

इतना ही नहीं अगर किसी पीएचडी छात्र (PhD students) का शोध काम तय समय से पहले पूरा हो जाता है और उसकी प्रगति अच्छी रहती है, तो वह तीन साल से पहले भी अपनी थीसिस जमा कर सकेगा। इससे मेहनती और प्रतिभाशाली छात्रों को फायदा मिलेगा। संस्थान के निदेशक प्रो. केके शुक्ला ने बताया, यह बदलाव शोध को ज्यादा उपयोगी और रोजगार से जोडने वाला है। अब पीएचडी का मतलब सिर्फ कागज पर लेख लिखना नहीं, बल्कि कुछ नया बनाकर दिखाना होगा।

डीन डॉ. शैलेंद्र जैन ने बताया कि पीएचडी और एमटेक के शोध विषय देश की जरूरतों को ध्यान में रखकर तय किए जाएंगे। ऊर्जा, तकनीक, निर्माण, डिजिटल व्यवस्था जैसे अहम क्षेत्रों पर ध्यान दिया जाएगा। इससे छात्रों का काम केवल किताबों तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि उसका उपयोग भी होगा।

क्या होगा फायदा

  • छात्रों का शोध सीधे उद्योग और समाज की जरूरतों से जुड़ेगा।
  • पेटेंट और प्रोडक्ट डेवलपमेंट को बढ़ावा मिलने से स्टार्टअप संस्कृति मजबूत होगी।
  • रोजगार और उद्यमिता के नए अवसर तैयार होंगे।
  • राष्ट्रीय महत्व के मुद्दों पर ठोस समाधान विकसित किए जा सकेंगे।

पहले ये था

  • अब तक पीएचडी डिग्री के लिए रिसर्च पेपर को जर्नल में प्रकाशित करना अनिवार्य माना जाता था।
  • पेटेंट या तकनीक के व्यावहारिक उपयोग को उतनी प्राथमिकता नहीं मिलती थी।
  • शोध विषय चयन में राष्ट्रीय महत्व को स्पष्ट रूप से अनिवार्य आधार नहीं बनाया गया था।
  • थीसिस जमा करने की समय-सीमा अपेक्षाकृत तय और कठोर रहती थी।
  • उद्योग से सीधे जुड़ाव और स्टार्टअप उन्मुख रिसर्च पर फोकस था। (MP News)