एमपी में कैंसर जैसी घातक बीमारी तेजी से बढ़ रही है। बुरी बात तो यह है कि स्कूली बच्चे भी इसके शिकार हो रहे हैं। प्रदेश के हजारों बच्चे इस जानलेवा बीमारी से जूझ रहे हैं। ऐसे 50% मामलों में समय पर रोग का पता ही नहीं चल पाता।
एमपी में कैंसर जैसी घातक बीमारी तेजी से बढ़ रही है। बुरी बात तो यह है कि स्कूली बच्चे भी इसके शिकार हो रहे हैं। प्रदेश के हजारों बच्चे इस जानलेवा बीमारी से जूझ रहे हैं। ऐसे 50% मामलों में समय पर रोग का पता ही नहीं चल पाता। ऐसे बच्चों के इलाज के लिए अब भोपाल में पायलट प्रोजेक्ट शुरू होगा। इससे न केवल बच्चों का कैंसर का दर्द कम होगा बल्कि कीमो के दौरान भी पढ़ाई नहीं छूटेगी।
बच्चों को कैंसर होने पर पूरा परिवार टूट जाता है। कीमोथेरेपी के लिए उन्हें लंबे समय तक घर से दूर रहना पड़ता है। ऐसे में उनकी पढ़ाई तक छूट जाती है। साथ ही अभिभावकों को भी मानसिक परेशानियों का सामना करना पड़ता है। ऐसे बच्चों और अभिभावकों की मदद के लिए राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (एनएचएम) ने योजना बनाई है।
इसके तहत सबसे पहले भोपाल में पायलट प्रोजेक्ट शुरू होगा। इसके बाद अन्य शहरों में भी सुविधा मिलेगी। इसमें बच्चों को घर के बाहर भी घर जैसा माहौल उपलब्ध कराया जाएगा। विशेषज्ञों का कहना है कि बच्चों में कैंसर के लक्षणों की पहचान जितनी जल्दी होगी, इलाज उतना ही आसान होगा।
एक रिपोर्ट के अनुसार, इस समय प्रदेश में करीब 5 हजार बच्चे विभिन्न तरह के कैंसर से जूझ रहे हैं। अभिभावकों को कीमोथेरेपी कराने के लिए बार-बार बड़े शहरों में जाना होता है। अभी कई अभिभावक बच्चों को इलाज के लिए अन्य प्रदेशों में भी ले जाते हैं। वहां भी उन्हें किसी तरह की परेशानी ना हो, एनजीओ इसमें भी मदद करेगा। टीम खुद अभिभावकों से संपर्क कर मार्गदर्शन करेगा।
आइसीएमआर की स्टडी के मुताबिक देश में केवल 34 प्रतिशत बाल कैंसर मरीजों का ठीक समय पर इलाज हो पाता है। 50 प्रतिशत मामलों में इस खतरे के बारे में काफी देर से पता चलता है तो कई बच्चे आर्थिक, सामाजिक व अन्य वजहों से इलाज नहीं करवा पाते हैं।