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सरकारी तंगहाली, अगले बजट में अंडे पर मुहर की संभावना कम

- आंनगबाड़ी में बच्चों को अंडा देने की योजना

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भोपाल

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Alok Pandya

Feb 22, 2020

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आंगनबाड़ी में बच्चों को अंडा दिए जाने का प्रस्ताव फिलहाल ठंडे बस्ते में चला गया है। बजट की कमी के चलते वित्त विभाग ने इस पर अभी तक अपनी मंजूरी नहीं दी है।

भोपाल। आंगनबाड़ी में बच्चों को अंडा दिए जाने का प्रस्ताव फिलहाल ठंडे बस्ते में चला गया है। बजट की कमी के चलते वित्त विभाग ने इस पर अभी तक अपनी मंजूरी नहीं दी है। पूरे प्रदेश में बच्चों को सप्ताह में तीन दिन अंडा परोसे जाने के लिए महिला बाल विकास को एक साल के लिए तकरीबन 130 करोड़ रुपए चाहिए। ऐसे में इस बात की संभावना बहुत कम है कि सरकार आगामी बजट में आंगनबाड़ी में बच्चों को अंडा देने के लिए धनराशि का प्रस्ताव करेगी।

महिला एवं बाल विकास मंत्री इमरती देवी ने कुपोषण दूर करने के लिए बच्चों को अंडा परोसने की योजना बनाई है। लेकिन इस योजना का शुरू होने से पहले ही विरोध शुरू हो गया। इसके बाद सरकार ने तय किया कि अंडा वैकल्पिक होगा, यानि जो बच्चे खाएंगे उन्हें अंडा दिया जाएगा अन्यथा सरकार इसके बदले में बच्चों को दूध परोसेगी। महिला बाल विकास विभाग ने 130 करोड़ रुपए सालाना खर्च का प्रस्ताव बनाकर वित्त विभाग को भेजा है। लेकिन वित्त विभाग ने उल्टे महिला बाल विकास से कहा है कि वे अपने नियमित बजट में से यदि बच्चों को अंडा खिला सकते हैं तो खिलाएं, सरकार के पास फिलहाल अतिरिक्त धनराशि नहीं है। ऐसे में महिला बाल विकास विभाग ने हाथ खड़े करते हुए कहा कि 130 करोड़ की व्यवस्था विभाग के मौजूदा बजट से नहीं हो पाएगी। वित्त विभाग इसके लिए अलग से ही धनराशि का प्रावधान करे। वित्त विभाग के पास यह फाइल पहुंचे एक महिना से ज्यादा हो चुका है, लेकिन वित्त विभाग ने अभी इस पर कोई जवाब नहीं दिया है।
सरकार का पहला फोकस अपने वचन पूरे करने पर है। ऐसे में मार्च में आने वाले राज्य सरकार के बजट में अंडे पर धनराशि के प्रावधान की संभावना बहुत कम है। महिला बाल विकास चाहता है कि अंडा परोसने की योजना पर अगर मुहर लगे तो उसे एक मुश्त धनराशि मंजूर हो, ताकि पूरे प्रदेश में एक साथ प्रभावी तरीके से कुपोषण को खत्म करने का अभियान चलाया जा सके।

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आदिवासी मत्रियों ने अंडा देने की उठाई थी मांग

कैबिनेट में आदिवासी मंत्रियों ने आंगनवाड़ी में अंडा देने की मांग उठाई थी। उनका कहना था कि आदिवासी बच्चे कुपोषित होते हैं, एेसे में अंडे से उनको बेहतर पोषण आहार मिल सकेगा।

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फेक्ट फाइल-

प्रदेश में संचालित आंगनबाडिय़ा- 97135
लाभार्थी बच्चे- 6156300

गर्भवती एवं धात्री माताएं- 1405510
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वर्जन-
आंगनबाड़ी केंद्रो में बच्चों को अंडा देने के लिए लगभग 130 करोड़ धनराशि की आवश्यक्ता है। इसके लिए विभाग ने वित्त विभाग के पास प्रस्ताव भेजा है, फिलहाल वित्त विभाग का जवाब नहीं आया है। वहां से निर्णय होने के बाद आगामी कदम उठाया जाएगा।

अनुपम राजन, प्रमुख सचिव महिला एवं बाल विकास