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कलावा से बनाई प्लास्टिक फ्री राखी, पिज्जा-बर्गर, बिस्किट जैसे डिजाइन

रक्षाबंधन को स्पेशल बनाने में जुटी बहनें

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भोपाल। रक्षाबंधन में कुछ दिन ही बाकी हैं। इसके लिए शहर की महिलाओं ने तैयार शुरू कर दी। कई महिलाएं अपने हाथ से बनाई हुई राखियां ही भाई की कलाई पर सजाएंगी। इन राखियों में इस बार लड़की से तैयार की राखियां भी हैं तो किसी ने मिनिएचर क्ले फूड से राखी तैयार की है। कई महिलाओं ने अपनी राखी में भाई की तस्वीर लगाई है। इसे डेकोरेशन की मदद से उसे राखी का रूप दिया है। वहीं, कुछ महिलाएं अपने घर के अलावा अन्य जरूतमंद महिलाओं को हाथ से बनी हुई राखियां गिफ्ट कर रही हैं, जिससे इस भाई-बहन के रिश्ते को कोरोना काल में भी मजबूती मिल सके।

पांच सालों से बना रही हूं राखी
रीमा मुंद ने बताया कि घर में ही होम मेड राखी बना रही हूं। बच्चे भी आर्ट एंड क्राफ्ट करते हैं तो उनके कुछ मटेरियल भी मेरे काम में आ जाते हैं। मैं पिछले पांच सालों से राखी बना रही हूं। इस बार मैं मिनिएचर क्ले फूड राखियां बना रही हूं। जिसमें कलाई पिज्जा, बर्गर, चाय-बिस्किट जैसे फूड की डिजाइन की राखियां तैयार कर रही हूं। सोसायटी में भी कई महिलाएं आती हैं जो होम मेड राखी की डिमांड करती हैं। उन्हें भी राखी बनाकर देती हूं। मैं ओडिशा की रहने वाली हूं इसलिए अभी वहां नहीं जा सकती। तो अपने भाई को विश ही कर पाऊंगी। मैं अपने बच्चों के साथ घर में ही राखी सेलिब्रेट करुंगी। भाई भी ऑनलाइन शामिल होगा।

वुडन से दो दिन में तैयार की डिजाइनर राखी
वामिका चित्रवंश ने बताया कि मैं वुडन से राखियां बना रही हंू। अभी मार्केट में जितनी भी राखियां आती हैं उनमें प्लास्टिक का उपयोग होता है। मैंने सिर्फ कलावा का इस्तेमाल किया है। इसमें राधा-कृष्ण, गणेश, सांतियां आदि डिजाइंस शामिल हैं। वहीं, नीरू सिंह मूलगांवकर ने बताया कि मैं अपने भाई के लिए घर पर ही राखी तैयार कर रही हूं। राखी में भाई की फोटो लगाऊंगी। इसमें पिंक शेड का इस्तेमाल किया है। भाई को पान का शौक है तो गुलकंद डालकर चॉकलेट भी बना रही हूं। मैंं हर साल अपने भाई के लिए खुद ही राखी बनाती हूं। इसके अलावा मैंने न्यूज पेपर और कलावा की मदद से कुछ कार्टून करेक्टर्स, एनिमल्स आदि डिजाइंस किए हैं। वहीं, ऊन की मदद से राखियां बनाकर अन्य लेडीज को भी दे रही हूं।