
गरीबों के आशियाने पर प्रदेश सरकार लिखेगी, इसमें ४० फीसदी पैसा हमारा
भोपाल। प्रधानमंत्री आवास को लेकर केंद्र और राज्य सरकार के बीच श्रेय लेने की होड़ लग गई है। गरीबों के आशियाने पर अब प्रदेश सरकार लिखेगी कि इसमें 40 फीसदी पैसा हमारा है। प्रधानमंत्री आवास के लिए 60 फीसदी राशि केंद्र सरकार देती है तो 40 फीसदी हिस्सा प्रदेश सरकार को मिलाना पड़ता है। सरकार को लगता है कि पीएम आवास का पूरा श्रेय केंद्र सरकार को मिल रहा है। लोग यह समझते हैं कि उनको प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने घर दिया है जिससे लोगों का झुकाव उनकी तरफ हो जाता है। जबकि इस राशि का एक बड़ा हिस्से के रुपए में चालीस फीसदी पैसा राज्य सरकार मिलाती है जिसकी जानकारी लोगों को नहीं है।
टाइल्स लगाने की तैयारी की जा रही
प्रदेश सरकार ने तय किया है कि लोगों को ये बताया जाएगा कि पीएम आवास के तहत उनको घर उपलब्ध कराने में में अकेले मोदी सरकार की नहीं राज्य सरकार की भी हिस्सेदारी है। घर में टाइल्स लगाकर उसमें घर का खर्च और उसमें लगा प्रदेश सरकार का पैसा लिखा जाएगा। प्रदेश में चार लाख पीएम आवास ऐसे हैं जो लगभग बन चुके हैंं, उन आवासों में अब ये टाइल्स लगाने की तैयारी की जा रही है।
विधायकों की सिफारिश पर नहीं मिलता घर :
केंद्र सरकार ने विधायक या अन्य स्थानीय जनप्रतिनिधियों की सिफारिश पर गरीबों को पीएम आवास देना बंद कर दिया है। पहले तीन फीसदी आवास जनप्रतिनिधियों की सिफारिश के आधार पर मिलते थे। केंद्र सराकर ने अब ये नियम हटा दिया है। सरकार ने केंद्र को पत्र लिखकर ये आपत्ति दर्ज कराई है।
सिफारिश को मान्य किया जाए
प्रदेश सरकार का कहना है कि कई लोग ऐसे होते थे जो पात्र होते हुए भी पीएम आवास की सूची में नहीं आ पाते थे, उनको स्थानीय जनप्रतिनिधि की सिफारिश के आधार पर मकान मिल जाता था। लेकिन अब केंद्र सरकार ने ये नियम बंद कर दिया है जिससे लोगों को मुश्किल पेश आ रही है। सरकार ने कहा है कि पीएम आवास के लिए फिर से जनप्रतिनिधियों की सिफारिश को मान्य किया जाए।
श्रेय का चुनाव कनेक्शन :
श्रेय की इस राजनीति का चुनाव कनेक्शन भी देखा जा रहा है। आने वाले समय में निकाय और पंचायत चुनाव हैं जिनमें पीएम आवास बड़ी भूमिका अदा कर सकते हैं। पीएम आवास के जरिए सरकार गरीबों का समर्थन हासिल करना चाहती है जिसको वोट में तब्दील किया जा सके। सरकार पीएम आवास के जरिए ये बताना चाहती है कि हर गरीब के पास उसका मकान हो इस सोच के साथ ही उनकी सरकार काम कर रही है और इस पर सरकार बड़ी राशि खर्च कर रही है।
मजदूरी को तरस रहे मजदूर:
सरकार ने केंद्र से मनरेगा के लिए एक हजार करोड़ रुपए की मांग की है। सरकार पिछले तीन माह से मनरेगा के मजदूरों को मजदूरी नहीं दे पाई है। विभागीय जानकारी के मुताबिक इस वित्तीय वर्ष में 2441 करोड़ की राशि का उपयोग किया जा चुका है। प्रदेश में 11 नवम्बर 2019 की स्थिति में योजना की मजदूरी के 274 करोड़ रुपये भुगतान नहीं किया गया है।
127 करोड़ रुपये की राशि ही स्वीकृत की गई
इसी प्रकार सामग्री के भुगतान के लिए केन्द्र सरकार ने प्रदेश को इस वित्त वर्ष में 860 करोड़ रुपये स्वीकृत किये हैं, जबकि केन्द्र के पास प्रदेश के 337 करोड़ रुपये लंबित हैं। प्रदेश सरकार पहले भी 570 करोड़ रुपये का माँग-पत्र केन्द्र सरकार को भेज चुकी है लेकिन प्रदेश को 127 करोड़ रुपये की राशि ही स्वीकृत की गई।
पीएम आवास का श्रेय केंद्र सरकार को मिलता है जबकि इसमें प्रदेश का हिस्सा चालीस फीसदी रहता है। हम पीएम आवास पर लिखवाएंगे कि इसमें कितना केंद्र और कितनी प्रदेश की राशि लगी है। अभी चार लाख मकान तैयार हैं जिस पर हम यह लिखवाएंगे। हमने केंद्र सरकार से ये भी कहा है कि विधायकों की सिफारिश पर जो मकान देने की व्यवस्था थी उसे फिर से लागू किया जाए।
कमलेश्वर पटेल, पंचायत एवं ग्रामीण विकास मंत्री
Published on:
18 Nov 2019 08:38 am
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