
मध्यप्रदेश के नए मुख्यमंत्री के तौर पर मोहन यादव आज शपथ ले रहे हैं, उनके साथ डिप्टी सीएम बनाए गए राजेंद्र शुक्ल और जगदीश देवड़ा भी आज शपथ ले रहे हैं। हालांकि मंत्रिमंडल के दूसरे साथियों को अभी इंतजार करना पड़ सकता है। उन्हें अगले हफ्ते में शपथ दिलाई जा सकती है। सबसे चौंकाने वाली खबर यह है कि पूर्व केंद्रीय मंत्री प्रहलाद सिंह पटेल और राष्ट्रीय महासचिव कैलाश विजयवर्गीय मंत्रिमंडल के सदस्य नहीं होंगे, वह प्रदेश सरकार में मंत्री नहीं बनेंगे। दोनों नेताओं को मुख्यमंत्री पद का दावेदार माना जा रहा था, लेकिन भाजपा ने चौंकाने वाला फैसला किया है। इसके साथ ही कई और भी बड़े चेहरों के मंत्रिमंडल से बाहर रहने की संभावना बन गई है।
खुद को दूर रखने के लिए कहा
पूर्व केंद्रीय मंत्री प्रहलाद सिंह पटेल और राष्ट्रीय महासचिव कैलाश विजयवर्गीय का मंत्रिमंडल में शामिल होना अब लगभग खत्म ही माना जा रहा है। दरअसल, दोनों नेताओं ने खुद इसकी पैरवी करते हुए पार्टी संगठन को स्पष्ट कर दिया है कि उनकी भूमिकाओं पर विचार न किया जाए। वह मध्यप्रदेश सरकार में मंत्री नहीं बनना चाहते हैं। कैलाश विजयवर्गीय ने अपनी जगह पर अपने सहयोगी और इंदौर विधानसभा दो से विधायक रमेश मैंदोला का नाम सुझाया है। रमेश का नाम आगे आने के बाद मालिनी गौड को झटका लगने की संभावना बन गई है।
जूनियर और सीनियर की परेशानी
दरअसल, दोनों नेता मुख्यमंत्री मोहन यादव से काफी सीनियर हैं। दोनों ही मुख्यमंत्री पद के दावेदार थे। प्रहलाद पटेल के यहां तो सुरक्षाकर्मी भी पहुंच गए थे, लेकिन अचानक से नाम चौंकाने वाला आया और सब कुछ बदल गया। उसके बाद दोनों नेता दिल्ली चले गए और जाने से पहले प्रदेश संगठन को स्पष्ट कर गए कि उनके नामों पर विचार न किया जाए। दरअसल, दोनों नेता मोहन यादव की कैबिनेट में काम करने को लेकर असहज थे। ऐसे में वह नहीं चाहते हैं कि अपनी भूमिका को इस स्तर तक लेकर आएं। माना जा रहा है कि कुछ और नेता भी इस तरह की पहल कर सकते हैं। जबकि कुछ वरिष्ठ नेताओं को मंत्रिमंडल से दूर ही रखा जाएगा। इनमें कई चौंकाने वाले नाम भी हो सकते हैं। जिन्हें अभी दावेदार माना जा रहा है, वह मंत्रिमंडल से दूर नजर आ सकते हैं।
गुजरात मॉडल नहीं होगा मध्यप्रदेश में
मध्यप्रदेश में गुजरात मॉडल पर मंत्रिमंडल बनेगा, इसको लेकर संदेह है। दरअसल, मुख्यमंत्री मोहन यादव, डिप्टी सीएम राजेंद्र शुक्ल और जगदीश देवड़ा निवर्तमान सरकार में कैबिनेट मंत्री रहे हैं। जब इनकी वापसी हुई है तो फिर कई और नेताओं की वापसी होगी। लेकिन कई नामों को बाहर का रास्ता दिखाया जा सकता है। सबसे महत्वपूर्ण यह है कि इस बार के चेहरों को चुनने में उन लोगों की भूमिका कमजोर हो गई है, जो इससे पहले तक सबसे मजबूत नेता के तौर पर दिखाई देते थे। फिलहाल नामों को लेकर संशय बना हुआ है।
Updated on:
13 Dec 2023 08:30 am
Published on:
13 Dec 2023 08:19 am
