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साहित्यकार हरिवंश राय बच्चन, कमलेश्वर और मालती जोशी की अनमोल चिट्ठियां, हेंड राइटिंग भी अट्रैक्टिव

Precious Letters of Great Persomnalities: आज के डिजिटल युग में जब संवाद के तरीके बदल गए हैं, पत्रों की महत्ता और भी बढ़ जाती है। पत्रिका आपके लिए कुछ ऐतिहासिक पत्र लेकर आया है, जिनको ख्यात लोगों ने लिखा है...

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आप भी पढ़ें हरीवंश राय बच्चन, कमलेश्वर, मालती जोशी जैसे साहित्यकार और सुषमा स्वराज के लिखे खत...

Precious Letters: ‘तेरे खत में इश्क की गवाही आज भी है। हर्फ धुंधले हो गए पर स्याही आज भी है।’ यह शायरी पत्रों के महत्व को अच्छे से बताती है। पत्रों के माध्यम से हम अपने अनुभवों को साझा कर सकते हैं, अपने प्रेम को व्यक्त कर सकते हैं और अपने लक्ष्यों को हासिल करने की प्रेरणा प्राप्त कर सकते हैं। आज के डिजिटल युग में जब संवाद के तरीके बदल गए हैं, पत्रों की महत्ता और भी बढ़ जाती है। पत्रिका आपके लिए कुछ ऐतिहासिक पत्र लेकर आया है, जिनको ख्यात लोगों ने लिखा है।

भोपाल शहर की लेखिका और चित्रकार अनीता सक्सेना ने बताया कि ये खत प्रसिद्ध लेखिका पद्मश्री मालती जोशी (Malti Joshi) का है। उन्होंने इसे 2017 में लिखा था। अनीता बताती हैं कि आई ( वे मालती जोशी को मां समान मानती थीं) के साथ मेरा पत्र व्यवहार लगातार होता रहता था। 4 जून को उनके जन्मदिन पर मैंने पत्र लिखा था और एक सुंदर कार्ड पर पेंटिंग बनाकर भेजी है। उसके जवाब में उन्होंने मुझे यह पत्र भेजा था।

यह पत्र बतौर संसदीय कार्य मंत्री 2003 में सुषमा स्वराज (Sushma Swaraj) ने साहित्यकार मालती बसंत को लिखा था, जिसमें वह आदर्श मां पर पुस्तक लिखने की सलाह दे रही हैं। मालती बसंत का कहना है कि वह अक्सर महिलाओं के उत्थान पर चर्चा करती रहती थीं।

वरिष्ठ साहित्यकार सत्यमोहन वर्मा बताते हैं, कवि हरिवंशराय बच्चन (Harivanshrai Bachchan) ने मुझे यह पत्र लिखा था। यह करीब 45 साल पुराना है। हम दोनों के बेहद घनिष्ठ और आत्मीय संबंध रहे हैं। हमारी अनेक मुलाकातें हुई हैं। इस पत्र में पुस्तक की पांडुलिपि का जिक्र है, जो पोस्ट से भेजी गई थी।

पटकथाकार कमलेश्वर की चिट्ठी

यह चिट्ठी देश के प्रसिद्ध उपन्यासकार, पटकथाकार और स्तंभकार कमलेश्वर की है, जो उन्होंने डॉ. कुंकुम गुप्ता को करीब 25 साल पहले लिखा था। डॉ. कुंकुम ने बताया कि मैंने उनसे एक राजनैतिक आलेख पर पत्र के माध्यम से अपने विचार रखे थे। इसके जवाब में कमलेश्वर जी ने यह प्रभावी पत्र मुझे भेजा। डॉ. कुंकुम कहती हैं कि यह पत्र मेरे पास उनकी वैचारिक धरोहर है, जिसे मैंने सहेजकर रखा है।