पार्क बनाने की तैयारी, ये भी नहीं देखा कि जमीन किसकी है

पार्क बनाने की तैयारी, ये भी नहीं देखा कि जमीन किसकी है

Bharat pandey | Updated: 19 May 2019, 04:04:03 AM (IST) Bhopal, Bhopal, Madhya Pradesh, India

नगर निगम का एक और कारनामा: निजी और अन्य विभागों की जमीन पर शुरू करवाया काम, अब कोर्ट में मामले

भोपाल। केंद्र की अमृत योजना से शहर में शानदार पार्क की शहरवासियों की उम्मीद शायद ही पूरी हो सके। करोड़ों रुपए के ये पार्क इंजीनियरों व नगर निगम की लापरवाही से कोर्ट में उलझकर रह गए हैं। ठेकेदार पार्क विकसित करने की बजाय अपने नुकसान की भरपाई के लिए कोर्ट की शरण में हैं।

ऐसे समझें अमृत पार्क के हाल
मेपकास्ट के सामने: कलियासोत डैम के पास बनने वाले पार्क का काम आरएंडके क्रिएशन को 1.63 करोड़ रुपए में दिया गया। ठेकेदार काम करने पहुंचे तो पता चला जमीन पर निजी व्यक्ति का दावा है और उसने कोर्ट में शासन पर केस लगा रखा है। काम ठप है।

 

चंदनवन पार्क : केरवा डैम की तरफ इसके निर्माण के लिए 3.50 करोड़ रुपए का ठेका परिहार फर्म को मिला। टेंडर ओपन हो गया, लेकिन काम शुरू नहीं हुआ। यहां वन और जंगल का विवाद है।

 

एमपी नगर: ठेकेदार अग्रवाल को काम मिला और वर्क ऑर्डर जारी हुआ। ठेकेदार ने मेटेरियल भी रखवा दिया। ये जमीन बीएसएनएल की निकली, जिसने काम रुकवा दिया। ठेकेदार का नुकसान हुआ। मामला कोर्ट में है।

 

बैरागढ़ गुलाब उद्यान: जंगल की जमीन का मामला उलझ गया। लंबे समय तक काम बंद रहा। अब निगमायुक्त विजय दत्ता ने संबंधित एजेंसियों के साथ बैठक की है। इसी तरह एमपी नगर में एक अन्य पार्क में जमीन के विवाद का सुलझाने में कड़ी मशक्कत करनी पड़ी।

 

जमीन चिह्नित करते समय लापरवाही

अमृत प्रोजेक्ट के लिए जमीन चिह्नित करते समय इंजीनियरों ने उसके मालिकाना हक और विवादों के संबंध में जानकारी नहीं की। योजना के तहत टेंडर लगाए, ठेकेदार तय किया और वर्क ऑर्डर जारी कर दिए। जब काम शुरू हुए तो हकीकत सामने आई।

 

शहर को नहीं मिल सके पार्क
टेंडरिंग प्रक्रिया 2018 के शुरुआती माह में हो गई थी। अगस्त-सितंबर में ठेकेदारों को वर्कऑर्डर जारी कर काम शुरू करने के निर्देश थे। डेढ़ साल में ये पार्क बन जाते, तो कलियासोत से लेकर केरवा और एमपी नगर व शहर के अन्य क्षेत्रों में लोगों को भ्रमण, मनोरंजन का नया स्थान मिल जाता, लेकिन विवादों के चलते पार्क नहीं बन सके।

 

मनमानी से हमेशा हुआ नुकसान
- नगर निगम के बहुमंजिला भवन निर्माण में लिंक रोड किनारे निगम ने बिना पीएचई की अनुमति के अन्य की जमीन पर काम शुरू करा दिया। मामला कोर्ट में पहुंचा। चार साल से काम एक इंच नहीं बढ़ पाया। कोर्ट में अवमानना के मामले अलग चल रहे हैं।
- स्मार्ट रोड में नवाबी दौर की पुश्तैनी जमीन पर निर्माण का मामला सामने आया। सडक़ निर्माण के बीच तथ्य उभरा और मामला हाईकोर्ट पहुंचा तो काम बंद रहा। 18 माह में पूरी होने वाली सडक़, तीन साल बाद भी पूरी नहीं हो पाई।


अब नगरीय प्रशासन से पत्राचार
नगर निगम के अधीक्षण यंत्री पीके जैन का कहना है कि इस मामले में नगरीय प्रशासन से पत्राचार किया जा रहा है। काम पूरा कराने की कोशिश है। हालांकि तत्कालीन संबंधित इंजीनियरों पर गलती करने को लेकर क्या कार्रवाई की जा रही है स्पष्ट नहीं है।

 

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