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कार्यकाल समाप्त होने के बाद भी स्पीकर को कैबिनेट मंत्री के समान सुविधाएं देने की कवायद, बंगला, गाड़ी सब होगा मुफ्त

- पूर्व मुख्यमंत्री के समान प्रोटोकॉल देने की है तैयारी, सदस्य सुविधा के प्रस्ताव पर सरकार लेगी निर्णय

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@ डॉ. दीपेश अवस्थी की रिपोर्ट,

भोपाल। विधानसभा अध्यक्ष के रहने के दौरान तो इनको पूरा सम्मान और प्रोटोकॉल मिलता है, लेकिन कार्यकाल समाप्त होने के बाद इनकी हैसियत सिर्फ पूर्व विधायक की ही रहती है। राज्य में इस सम्मानजनक पद पर रहने के बाद इनको आगे भी पूरा सम्मान और प्रोटोकॉल मिलता रहे, इसके प्रयास शुरू हो गए हैं। प्रयास यही है कि पूर्व विधानसभा अध्यक्ष को पूर्व मुख्यमंत्री की तरह ताजिंदगी सुविधाएं मिलें। यानी सभी सुविधाएं मुफ्त मिलती रहेंंगीं।
प्रोटोकॉल की बात करें तो विधानसभा अध्यक्ष का स्थान मुख्यमंत्री से ऊपर होता है। कार्यकाल समाप्त होने के बाद मुख्यमंत्री को तो कैबिनेट मंत्री के समान सुविधाएं और प्रोटोकॉल मिलता है, लेकिन विधानसभा अध्यक्ष को ऐसी कोई सुविधा नहीं मिलती। इसलिए उन्हें कार्यकाल समाप्त होने के बाद भी पूरा सम्मान दिए जाने के लिए कवायद शुरू हुई है। विधानसभा की सदस्य सुविधा समिति में इस पर चर्चा हुई है। अभी यह चर्चा प्रारंभिक तौर पर है। इसकी अगली बैठक जल्द ही होने वाली है। विधानसभा सचिवालय की ओर से राज्य सरकार को प्रस्ताव भेजा जाएगा। सरकार की हरीझंडी के बाद इसे लागू किया जाएगा। ऐसा इसलिए क्योंकि मुफ्त सुविधाएं देने में सरकार के खजाने पर भार आएगा।

ये आएंगे दायरे में -
राज्य में वैसे तो एक दर्जन से अधिक विधानसभा अध्यक्ष रहे हैं, लेकिन वर्तमान में सिर्फ दो पूर्व अध्यक्ष ही हैं। इनमें डॉ. सीतासरन शर्मा, नर्मदा प्रसाद प्रजापति शामिल हैं। राज्य सरकार की हरीझंडी मिलने के साथ इनको पूर्व मुख्यमंत्री के समान प्रोटोकॉल और सुविधाएं मिलने लगेंगीं।

मिलती हैं सुविधाएं -
पूर्व मुख्यमंत्री को कैबिनेट मंत्री का दर्जा मिलता है। इसके तहत उन्हें सुसज्जित नि:शुल्क आवास, सहित निजी कार्यालय के लिए अमला और सरकारी वाहन मिलता है। इसके अलावा अन्य सुविधाएं भी शामिल हैं। साथ ही प्रोटोकॉल के तहत सरकारी आयोजनों में विशेष आमंत्रण भी दिया जाता है।

विधायकों के वेतनभत्तों की भी चिंता -
अध्यक्ष को कार्यकाल समाप्त होने के बाद प्रोटोकॉल दिए जाने के साथ विधायकों के वेतन भत्ते की चिंता भी विधानसभा को है। इसके लिए प्रोटोकॉल की आड़ लेकर इनके वेतन भत्ते बढ़ाए जाने पर भी विचार हो रहा है। प्रस्ताव है कि जिस तरह सरकारी अधिकारियों का प्रतिवर्ष वेतन बढ़ता है, उसी तरह विधायकों के वेतन-भत्तों में भी इजाफा हो जाए।

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विधानसभा अध्यक्ष को वेतन भत्ता -
वेतन - 47000 प्रतिमाह
निर्वाचन क्षेत्र भत्ता - 45000 प्रतिमाह
सत्कार भत्ता - 45000 प्रतिमाह
दैनिक भत्ता - 1500 प्रतिदिन

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विधायकों को वेतन भत्ता -
वेतन - 30000 प्रतिमाह
निर्वाचन क्षेत्र भत्ता - 35000 प्रतिमाह
टेलीफोन भत्ता - 10000 प्रतिमाह
चिकित्सा भत्ता - 10000 प्रतिमाह
अर्दली भत्ता, कम्प्यूटर ऑपरेटर - 15000 प्रतिमाह
लेखन सामग्री एवं डाक भत्ता - 10000 प्रतिमाह

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विधानसभा अध्यक्ष का प्रोटोकॉल में ऊंचा स्थान है, लेकिन कार्यकाल समाप्त होने के बाद वह आम व्यक्ति हो जाता है। समिति में इस बात पर विचार हुआ है कि कार्यकाल समाप्त होने के बाद भी विधानसभा अध्यक्ष को प्रोटोकॉल मिलना चाहिए। इसी प्रकार विधायकों के प्रोटोकॉल पर भी सुझाव आए र्हैं। विधानसभा अध्यक्ष के संज्ञान में ये समिति के सुझाव लाए गए हैं।
- शैलेन्द्र जैन, सभापति सदस्य सुविधा समिति मप्र विधानसभा