जहां मंदिर, मस्जिद, गुरुद्वारे के साथ ही थियोसोफिकल सोसाएटी का कार्यालय है। यहां हर रोज घंटा-घडिय़ाल के साथ ही नमाज की अजान भी कानों में गूंजती हैं। इनका निर्माण ग्वालियर के शासक माधवराव सिंधिया प्रथम ने अपने शासनकाल में कराया था। इसके शुभारंभ के लिए खुद प्रिंस ऑफ वेल्स आए थे। उन्होंने ही इसका शुभारंभ किया था।