
Manoj Srivastava
भोपाल। मध्यप्रदेश के संस्कृति विभाग के प्रमुख सचिव मनोज श्रीवास्तव ने कहा है कि ऑस्कर के लिए नामित होने वाली फिल्मों में जो देश की छवि बुरी दिखाता है वो पुरस्कार के काबिल हो जाता है। राजकुमार राव की फिल्म 'न्यूटन' हाल ही में ऑस्कर के लिए नामित हुई है। श्रीवास्तव की इस पोस्ट पर कई लोग प्रतिक्रिया व्यक्त कर रहे हैं और कुछ शेयर कर रहे हैं।
दुनिया के सबसे बड़े लोकतंत्र में चुनावी पृष्ठभूमि के खिलाफ बनी हिन्दी फिल्म न्यूटन को आस्कर में सर्वश्रेष्ठ विदेशी भाषा की फिल्म के लिए भारत की आधिकारिक प्रविष्टि के रूप में नामांकित किया गया है।
और क्या लिखा वॉल पर
संस्कृति विभाग के प्रमुख मनोज श्रीवास्तव ने लिखा है कि न्यूटन देखी। यह मूवी भी आस्कर के लिए नामांकित हुई। स्लमडॉग मिलिनेयर भी हुई थी। सो जो हमारे देश को बुरी तरह से प्रस्तुत करे, वो पुरस्कार के काबिल। यदि यही सब कुछ है, तो फिर भारत हमेशा अपनी आजादी को व्यर्थ ही करता रहेगा। आखिरकार यह मूवी सिद्ध क्या करती है? कि हमारी डेमोक्रेसी सिर्फ दिखावे की है? फारेन मीडिया के भुलावे के लिए रचा गया प्रपंच। अन्यथा तो यहां रेजीमेंटेड फोर्स के बूटों के तहत जिंदगी कराहती है। यानी सिर्फ जनता ही gullible नहीं है, बेचारा फारेन मीडिया भी उतना ही gullible है। जिस विदेशी मीडिया से हमारी लगातार यह शिकायत रही है कि भारत को हमेशा बुरी तरह से ही पेश करता है वह यहां इतना आज्ञाकारी दिखाया गया है। भारतीय authorities का गुलाम। चुनावी प्रक्रिया में सेक्टर मजिस्ट्रेट और जोनल मजिस्ट्रेट का काम भी फिल्म में रेजीमेंटेड फोर्स ही करती दिखाई गई है। जिला कलेक्टर,जो कि जिले में मुख्य निर्वाचन प्राधिकारी है, के कहीं दर्शन नहीं होते।
एक ट्रेनिंग में नायक को कोई यह उत्तर नहीं देता कि रि-पोल चूंकि गिनी-चुनी जगहों पर होता है, वहां बेहतर कानून व्यवस्था निर्मित की जा सकती है। फिल्म अभी भी वनवासियों को 50s के डिस्कनेक्ट में दिखाती है। वनवासी जैसे अभी भी उतने ही डीपफ्रोजन हों।
और यदि हमारे गणतंत्र ने वनवासी क्षेत्रों के कौमार्य को इतना ही अक्षत रखा है तो शिकायत किस बात की है? वे वनवासी हमारी लोकतांत्रिक प्रक्रिया का सुसूचित हिस्सा न बनें, इसकी कोशिश नक्सलियों की है और इसके किसी उपयोग और प्रासंगिकता के न होने की मुहर इस फिल्म की है।
क्या है न्यूटन फिल्म में
फिल्म 'न्यूटन' सरकारी क्लर्क की कहानी है, जो छत्तीसगढ़ के माओवादी प्रभावित क्षेत्र में स्वतंत्र और निष्पक्ष मतदान कराने के लिए संघर्ष करता है। इस फिल्म को 90वें अकादमी अवार्ड्स (ऑस्कर) की सर्वश्रेष्ठ विदेशी भाषा फिल्म श्रेणी में रखा गया है जिसे भारत की अधिकारिक एंट्री के रूप में भेजा गया है।
Published on:
16 Oct 2017 06:10 pm
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