
एक बस जिसने देखते ही देखते कर दिया राजधानी का ट्रैफिक जाम, देखें वीडियो
सरकार की पहल, टीएनसीपी को बनाया नोडल एजेंसी, विभागों में बनेगा तालमेल मास्टर प्लान की प्रपोज्ड सड़कों पर कब्जे से समय बीतने पर ड्रॉप हो जाती है प्लानिंग शहर की कई प्रस्तावित सड़कों को किया गया निरस्त, इससे अंदरूनी संकरी सड़कों पर बढ़ रहा दबाव हर्ष पचौरी भोपाल। शहर में मास्टर प्लान की प्रपोज्ड सड़कों को अब हर हाल में बनाया जाएगा। वर्तमान में यदि किसी प्रपोज्ड सड़क पर कब्जे या कोई और प्रोजेक्ट आते हैं तो पुरानी प्रपोज्ड रोड को ड्रॉप कर दिया जाता है।
ये इलाके सर्वाधिक प्रभावित
कोलार, कटारा हिल्स, नीलबड़, रातीबड़, भौंरी, अयोध्या बायपास, ११ मील, मिसरोद के इलाकों पर सबसे ज्यादा असर पडऩे की संभावना है। वर्ष २०१४ के बाद इन इलाकों का नगर निगम में विलय हुआ था। ज्यादातर बिल्डिंग प्रोजेक्ट पंचायतों की अनुमति पर चल रहे हैं। नगर निगम एक बार इन बिल्डिंग परमिशन को निरस्त करने का प्रयास कर चुका है लेकिन बिल्डर लॉबी के दबाव में कार्रवाई टल गई थी।
यहां 80 फीट रोड प्रस्तावित
होशंगाबाद से कटारा हिल्स रोड- होशंगाबाद रोड से कटारा हिल्स तक ८० फीट रोड मुआवजे के लिए अटकी रही अब इसे निरस्त कर दिया गया है। सीपीए की इस ८० फीट रोड से अवधपुरी, साकेत नगर, बागसेवनिया, बागमुगलिया, कटारा हिल्स, बर्रई, लहारपुर की तरफ बसे रहवासी इलाकों तक सीधी एपरोच रोड बननी है। आबादी अभी बागसवेनिया थाने के बगल से जाने वाले मार्ग का इस्तेमाल करती है जो ७ किमी लंबा है जबकि सीपीए की ८० फीस रोड बनने से ये दूरी ३ से ४ किमी में सिमटती।
कटारा हिल्स से बीएचईएल- कटारा हिल्स की ओर तैयार होने वाले प्रोजेक्ट सहित हाऊ सिंग बोर्ड की कालोनी तक पहुंचने के लिए अभी बागसेवनिया थाने के बगल से गुजरने वाली सड़क एक मात्र सहारा है। यहां शहर का एक बड़ा तबका निवास करता है जिसे कोलार और बीएचईएल तक पहुंचने के लिए चौड़ी रोड की कमी का सामना करना पड़ता है।
कोलार ८० फीट रोड- शहर के प्रमुख उपनगर के रूप में उभर कर सामने आए कोलार क्षेत्र के लिए समानांतरण मार्ग की बेहद जरूरत है। इसके लिए गणपति एनक्लेव के पास से कोलार तक ८० फीट रोड का निर्माण किया जा सकता है। इस पर बीएमसी में एक सदन की सहमति भी बन चुकी थी लेकिन काम चालू नहीं हो सका।
कलियासोत से हबीबगंज फोरलेन रोड- कोलार को हबीबगंज से सीधे जोडऩे वाली कलियासोत-हबीबगंज फोरलेन रोड का निर्माण लचर रवैये के कारण गति नहीं पकड़ पा रहा है। यदि ये सड़क तैयार हो जाए तो कोलार को होशंगाबाद और बीएचईएल से सीधे कनेक्टिविटी मिल सकती है। इसके अलावा कोलार से हबीबगंज तक आने वाले मार्ग की दूरी भी घटकर आधी रह जाएगी।
मास्टर प्लान की सड़कों को अनिवार्य रूप से बनाने नीति बनाई गई है। टीएनसीपी को नोडल एजेंसी बनाकर इसे लागू किया जाएगा। मास्टर प्लान का नया मसौदा प्रकाशित होने के साथ ये व्यवस्था लागू होगी।
- जयवर्धन सिंह, मंत्री, नगरीय प्रशासन
Published on:
30 Nov 2019 09:23 am
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