
बारिश का चौथे नक्षत्र में प्रवेश, अब अश्लेषा नक्षत्र की बारिश, चातक होगा वाहन
भोपाल
इन दिनों भोपाल सहित प्रदेश भर में बारिश का दौर चल रहा है। इस साल मौसम विभाग के साथ-साथ ज्योतिषियों ने भी अच्छी बारिश की संभावना जताई थी। मंगलवार को बारिश का चौथे नक्षत्र में प्रवेश हो गया है। बारिश अश्लेषा नक्षत्र में पहुंच गई है। इस नक्षत्र का वाहन चातक होगा। ज्योतिषियों के अनुसार इसमें भी अच्छी बारिश के आसार है,लेकिन रूक-रूककर बारिश होगी।
अश्लेषा नक्षत्र में भी अच्छी बारिश के योग
ज्योतिष मठ संस्थान के पं. विनोद गौतम का कहना है कि अश्लेषा नक्षत्र में अच्छी बारिश के योग बन रहे हैं। माना जाता है कि इस नक्षत्र में यत्र, तत्र, सर्वत्र वर्षा होती है, अर्थात पूरे देश में बारिश होगी। इसका वाहन चातक और अधिपति देवता सूर्य है। इसके बाद 17 अगस्त से मघा नक्षत्र की शुरुआत होगी, इसमें खंडवृष्टि होगी, अर्थात कहीं बहुत अधिक तो कहीं कम बारिश होगी। इस साल 11 अक्टूबर तक बारिश के नक्षत्र रहेगा। बारिश का आखिरी नक्षत्र हस्त 28 सितम्बर से 11 अक्टूबर तक रहेगा।
इस माह अच्छी बारिश के योग
ज्योतिषाचार्य अंजना गुप्ता का कहना है कि इस समय बारिश का चौथा नक्षत्र अश्लेषा प्रारंभ हो गया है, इसी प्रकार मघा नक्षत्र की शुरुआत 17 अगस्त से होगी। अश्लेषा नक्षत्र के बारे में कहां जाता है कि इस नक्षत्र में होने वाली बारिश से जमीन की प्यास बुझ जाती है, और नागदेव के बिल तक पानी पहुंच जाता है। इसलिए इस नक्षत्र में ही नागदेवता बिल से बाहर निकलकर आशीर्वाद देते हैं। इसलिए इस दौरान ही नागपंचमी का पर्व मनाया जाता है। यह भी माना जाता है कि इस नक्षत्र की बारिश से चातक की प्यास बुझ जाती है इसलिए इसका वाहन चातक रहता है। इसके बाद मघा भी बारिश का प्रमुख नक्षत्र है।
आठ नक्षत्रों में होती है बारिश
बारिश के कुल आठ नक्षत्र माने गए हैं। वर्षाकाल की शुरुआत 22 जून को सूर्य के आद्र्रा नक्षत्र में प्रवेश के साथ होता है। इसके बाद हस्त नक्षत्र तक कुल आठ नक्षत्र बारिश के माने गए हैं। हर नक्षत्र 15 दिनों तक विद्यमान रहता है। इस तरह कुल चार माह का समय वर्षाकाल माना गया हैं।
Published on:
03 Aug 2021 11:13 pm
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