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अंग्रेजों से युद्ध कर अवध की गरिमा फिर लौटाते हैं राजा बख्तावर सिंह

शहीद भवन में नाटक 'राजधर्म' का मंचन

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drama in bhopal

प्रेमचंद लिखित इस नाटक का नाट्य रूपांतरण व निर्देशन आरती विश्वकर्मा ने किया है

भोपाल। शहीद भवन में सोमवार को अविराम जन कल्याण संस्था की ओर से नाटक 'राजधर्म' का मंचन किया गया। प्रेमचंद लिखित इस नाटक का नाट्य रूपांतरण व निर्देशन आरती विश्वकर्मा ने किया है। नाटक में लाइव म्यूजिक के साथ ही शस्त्रों का भी इस्तेमाल किया गया। डायरेक्टर ने बताया कि प्रेमचंद ने हमेशा ही समाज और रिश्तों के बारे में लिखा है। जब मैंने पहली बार उनकी इस कहानी राजभक्त को पड़ा तो लगा कि उनमें भी कहीं ना कहीं एक राज भक्त बहुत गहरे से बैठा है जो समय-समय पर समाज में अपनी उपस्थिति देता रहा है । इसे मंच पर लाना इतना आसान नहीं था। नाटक में संगीत कहानी का हिस्सा होना चाहिए,लेकिन युद्ध की पृष्ठभूमि पर संगीत कहीं ना कहीं खलता है।

लखनऊ का बादशाह अंग्रेजों को अपना सच्चा हितैषी समझता है

नाटक की कहानी अवध सल्तनत की है, जिसमें राजा बख्तावर सिंह जैसे वतन परस्त हैं तो रोशनुद्दोलाह जैसे गद्दार भी हैं। नाटक में दिखाया कि लखनऊ का बादशाह नासिरुद्दीन अंग्रेजों को अपना सच्चा मित्र और हितैषी समझता है। वह राजा साहब पर भी भरोसा करता है, लेकिन खुद ही षड़यंत्र का हिस्सा बनकर वह राजा को कारावास भेज देता है। फिर स्वयं षड़यंत्रकारियों के जाल में फंस जाता है। तब राजा अपने अस्तित्व की लड़ाई के साथ-साथ अवध की सियासत और बादशाह नासिरुद्दीन के तख्त के लिए भी लड़ते हैं। राजनीतिक और अंग्रेजों की रणनीति सिपाही से उसका ओहदा भी छीन लेती है। अंत में दिखाया कि राजा फिर सभी को परास्त कर अवध को उसकी गरिमा और तख्त ओ ताज लौटाते हैं।