
भोपाल। तालाब पर बने बांध के रखरखाव में जल संसाधन विभाग के अफसरों की बड़ी लापरवाही सामने आई। डैम सेफ्टी एक्ट के तहत प्री-मानसून में इस बांध की जांच कर इसे कैटेगरी-3 यानी सुरक्षित बांध घोषित किया गया। इसके बाद भी महज दो माह में ही बांध फूट गया। अधिकारियों का कहना है कि मिट्टी के इस बांध में चूहों ने छोटे-छोटे छेद बना दिए। अंदर ही अंदर पानी रिसने से बांध कमजोर हो गया था। जांच में इसका पता भी नहीं लगाया जा सकता।
हालांकि, ग्रामीणों का कहना है कि बांध से लंबे समय से पानी का रिसाव हो रहा था। शिकायत के बाद भी मरम्मत नहीं की गई। बांध की जांच की जिम्मेदारी डायरेक्टर डैम सेफ्टी बीएस मूवेल और डिप्टी डायरेक्टर अर्जुन नरवरिया को सौंपी गई है। बुधवार को वे इसकी जांच करेंगे।
रात में ही होने लगा था तेज रिसाव
बताया जाता है कि सोमवार की रात में इस जलाशय से पानी का तेज रिसाव होने लगा था। इसकी जानकारी लगते ही कलेक्टर मयंक अग्रवाल और एसपी राकेश सिंह मौके पर पहुंच गए थे। जहां जलाशय के फूटने की आशंका के चलते पौंड़ी गांव को खाली कराने के निर्देश दिए थे। रात्रि में तहसीलदार मोनिका वाघमारे अपने स्टाफ के साथ मौके पर थी। उन्होंने तालाब के पास स्थित 10 घरों के परिवारों को बाहर निकलवाया, लेकिन लीकेज बढ़ने की वजह से रात्रि में ही पूरा गांव खाली कराने के लिए पुलिस और प्रशासन के अधिकारी मौके पर पहुंच गए थे। सुबह 5 बजे अचानक जलाशय का एक हिस्सा फूट गया था। इससे पूरे गांव में पानी भर गया।
60 से अधिक मकान डूबे, खड़ी फसलें हुई बर्बाद
इस घटना में किसानों के खेत पानी में डूब गए। कई घर पानी के चलते जल मग्न हो गए। जैतगढ़ गांव के किसानों के मकानों और खेतों की खड़ी फसलों को भारी नुकसान हो गया। घरों में रखा राशन पानी और गृहस्थी का समान भी चौपट हो गया। तहसीलदार मोनिका बाघमारे के मुताबिक पौंड़ी और जैतगढ़ गांव में कुल 50 से 60 मकान क्षतिग्रस्त हुए हैं। खेतों में हुए नुकसान का सर्वे कराया जा रहा है।
Published on:
25 Jul 2023 09:49 pm
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