
भोपाल। विमुक्त जाति दिवस के अवसर पर जनजातीय लोक कला एवं बोली विकास अकादमी और उच्च शिक्षा उत्कृष्टता संस्थान के सहयोग से जनजातीय संग्रहालय में दो दिवसीय कार्यक्रम का आयोजन किया जा रहा है। पहले दिन जैसलमेर के सुगना राम भोपा ने अपने साथियों के साथ घुमंतू भोपाओं का गायन किया गया। सुगना ने बताया कि मैं अब तक 40 देशों में प्रस्तुति दे चुका हूं। प्रस्तुति में फड़ वाचन करता हूं। फड़ एक कपड़ा होता है जिस पर विभिन्न प्रकार की आकृतियां बनी होती है। इन्हें लोकवाद्य (रावण हत्था) की मदद से गाकर सुनाता हूं। एक फड़ करीब 10 से 12 मीटर की होती है जिसमें सत्तर से अस्सी हजार शब्द होते हैं और पहले इस फड़ को सात रातों तक गाया जाता था। रावण हत्थे को रावण ने भगवान शिव को प्रसन्न करने बनाया था। यह बांस, नारियल की कपाल और घोड़े के 15 बालों से तैयार किया गया है। इतने देशों की यात्रा करने के बाद भी मैं डेरे में ही रहता हूं।
1400 ईस्वी में सिंध प्रांत से राजस्थान में पहला ऊंट आया
प्रस्तुति के दौरान उन्होंने महाराज पाबू राठौर की कथा सुनाई। कलाकारों ने प्रस्तुति के माध्यम से बताया कि पाबू जी महाराज 1400 ईस्वी में सिंध प्रांत से राजस्थान में पहला ऊंट लेकर आए थे। इससे पहले राजस्थान में ऊंट नहीं पाए जाते थे, इसीलिए भोपा उन्हें अपना लोकदेवता मानते हैं और उनकी कथा में उनके द्वारा किए गए कार्यों और योगदान को बताते हैं।
Published on:
31 Aug 2022 12:13 am
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