
बांस
भोपाल। बांस मिशन में एमडी रहे एके भट्टाचार्य ने बिना अनुमति विदेश यात्रा करने के मामले में उलझ गए हैं। भट्टाचार्य ने नियमों को दरकिनार करते हुए बिजनेस क्लास में करीब 20 लाख रुपए की देश-विदेश की हवाई यात्राएं की। इसके अलावा उन पर 5 लाख रुपए का दूसरे मदों में बकाया भी निकला है। इस मामले की खुलासा आडिट रिपोर्ट में हुआ है। उनकी ग्रेच्यूटी की राशि से १० लाख रुपए वसूली की जाएगी। शेष 15 लाख रुपए की नकद वसूली का नोटिस थमाया जा सकता है।
भट्टाचार्य ने 2014 से लेकर 2015 तक २० लाख रुपए की हवाई यात्राएं की। शासन से बिना अनुमति के विदेश भी गए थे। वे 2015 में रिटायर हो गए। उनके रिटायरमेंट के एक साल बाद बांस मिशन के ऑडिट में इसका खुलासा हुआ। ऑडिट में यह बात सामने आई की भट्टाचार्य ने बिना पात्रता के बिजनेस क्लास में दिल्ली, हैदराबाद, लखनऊ, मुम्बई सहित विदेश की कई हवाई यात्राएं की हैं। मामला उजागर होने के बाद वित्त विभाग ने २०१६ में रिकवरी के आदेश दिए थे।
भट्टाचार्य ने विभाग के अधिकारियों से सांठ-गांठ कर इस मामले को पिछले तीन साल से दबवा रखा था। हाल ही में एक शिकायत के बाद उनकी पुरानी फाईल खोली गई है। भट्टाचार्य के सरकारी आवास खाली न करने के कारण उनकी ऑडिट आपत्ति आने के बाद विभाग ने भट्टाचार्य की ग्रेच्यूटी की राशि रोक रखी थी। अब पूराना मामला खुलने के बाद सरकार उनके ग्रेच्यूटी के १० लाख रुपए से वसूली करने के साथ शेष राशि के लिए नोटिस जारी करेगी।
भट्टाचार्य ने कोर्ट में की अपील
भट्टाचार्य ने ग्रेच्यूटी नहीं मिलने के बाद इस मामले की कोर्ट में याचिका लगा दी। याचिका में उन्होंने कहा कि मेरे ग्रेच्यूटी में से मकान का किराया काटने के बाद मेरी शेष राशि वापस की जाए। इधर संपदा ने उनके मकान का किराया २ लाख 88 हजार रुपए और उसमें 37800 रुपए किराया पर ब्याज उनकी ग्रेच्यूटी से वसूलने के लिए शासन के पास प्रस्ताव भेज दिया था। उन्होंने विभाग में अभी तक न तो मकान का किराया जमा किया है और न ही उस राशि पर लगने वाली राशि दी है।
विभाग की भूमिका पर संदेह
सरकार विभाग के अधिकारियों की भूमिका पर भी संदेह कर रही है। क्योंकि मिशन में वित्तीय अनियमितता और उनके विदेश यात्रा की शिकायत विभाग में पहले ही हो चुकी थी। इसकी आधार पर बांस मिशन का ऑडिट कराया गया था। जांच में शिकायतें सही पाई गई। इसके बाद भी भट्टाचार्य के पेंशन के पूरे मामले निपटाते हुए अधिकारियों ने उन्हें एनओसी दे दी। इसके चलते उनका राशि सरकार ने वापस कर दी। ग्रेजुयटी इसलिए रोक रखी थी क्योंकि उन्हेंने मकान खाली नहीं किया था।
मैंने जो भी यात्राएं की है, वो सरकार से अनुमतियां लेकर की है। हवाई जहाज में मुझे बिजनेस क्लास में यात्रा करने की पात्रता थी। शायद यह जानकार उन लोगों को नहीं है। जहां तक मकान खाली नहीं करने की बात है तो तत्कालीन मुख्य सचिव ने मुझे मकान आवंटित किया था। -एके भट्टाचार्य, पूर्व एमडी बांस मिशन
Published on:
18 Dec 2019 08:15 am
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