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टिक-टॉक पर लाइक एडिक्शन बिगाड़ रही है रिश्ते

ऑनलाइन फेमस होने की चाहत बना रही बीमार, मनोचिकित्सक की लेना पड़ रही मदद  
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टिक-टॉक पर लाइक एडिक्शन बिगाड़ रही रिश्ते

भोपाल। अब तक यूथ को कैंडी क्रश, पब्जी, टेंपल रन जैसे ऑनलाइन गेम्स की ही लत लगने के मामले सामने आते थे, लेकिन अब ऑनलाइन सोशल साइट टिक-टॉक भी यूथ को एडिक्शन का शिकार बना रही है।

यूथ पहले तो फनी वीडियो देख इसकी गिरफ्त में आते हैं। धीरे-धीरे लाइक्स के फेर में वे इस कदर प्रभावित होने लगते हैं कि हर दिन घंटों लाइक्स के लिए नए-नए वीडियो आइडिज ही सोचते रहते हैं। कई बार उनकी पेरेन्ट्स से अनबन भी हो जाती है। अन्य गेम्स की अपेक्षा इसका एडिक्शन यूथ में इतना तेजी से बढ़ रहा है कि मनोचिकित्सक भी हैरान हैं। शहर के मनोचिकित्सकों के पास हर दिन तीन से चार नए मामले सामने आ रहे हैं।

अनजान से जुडऩा भी खतरनाक

सायबर एक्सपर्ट आलोक कुमरावत का कहना है कि अन्य सोशल साइट्स पर यूजर किससे जुड़ रहा है। यह उसे पता होता है, लेकिन टिक-टॉक पर सिर्फ दो ही ऑप्शन होते हैं ऑन मी या पब्लिक।

इससे जुडऩा खतरे से खाली नहीं। क्योंकि किसी यूजर की प्रोफाइल कौन देख रहा है, यह पता ही नहीं होता। इसमें वीडियो सेंड करने वाला कोई फिल्टर भी नहीं लगा सकता।

हिंसक वीडियो बच्चों को सबसे ज्यादा प्रभावित करते हैं। इसमें अडल्ट कटेंट की भी भरमार है। कहने को तो सिर्फ 13 साल से बड़े बच्चे ही इसका यूज कर सकते हैं, लेकिन इसे रोकने के लिए कोई फ्लिटर नहीं है।

लाइक्स नहीं आना बढ़ाता है अवसाद

मनोचिकित्सक डॉ. सत्यकांत त्रिवेदी के अनुसार अभी हाल ही में मध्यप्रदेश सरकार ने पब्जी को बैन की मंशा जाहिर की थी। सोशल साइट्स पर किसी गेम को बैन करने से प्रॉब्ल्म का सॉल्यूशन नहीं होगा।

पेरेन्ट्स को बच्चों को समझाकर इंटरनेट को यूज करने के एथिक्स समझाने होंगे। बच्चे और किशोर अपने साथियों को देखकर टिक-टॉक से जुड़ जाते हैं। जब उसे स्पेशल कमेंट्स और लाइक्स नहीं मिलते हैं, तो वे अवसाद का शिकार हो जाते हैं। कई केसेज में तो बच्चों ने लाइक्स नहीं मिलने पर स्कूल जाना तक छोड़ दिया। लगातार घंटों तक इसका यूज करने से आई साइट कमजोर होने का भी खतरा बढ़ता है।

केस-1 16 वर्षीय लड़की टिक-टॉक पर हर दिन छह से सात घंटे बिताने लगी। वह दिनभर इस तरह के वीडियो तलाशती, जिसे ज्यादा लाइक और शेयर मिले हों और वह भी इसी तरह के वीडियो बनाने लगी।

वह दिनभर अलग-अलग तरह के मेकअप करती रहती। लाइक्स नहीं आने पर कभी उदास हो जाती तो कभी गुस्सा करने लगती। पेरेन्ट्स ने जब उसे रोकने की कोशिश की तो उसने स्कूल जाना बंद कर दिया। नौवीं क्लास के मंथली टेस्ट तक छोड़ दिए। पेरेन्ट्स को उसका एडिक्शन दूर करने के लिए मनोचिकित्सक की मदद लेना पड़ी।


केस-2 एक महिला को टिक-टॉक की इस कदर लत लगी कि वह सुबह चार बजे तक इस पर वीडियो देखती रहती। वह अपने साथ अपने तीन साल के बेटे को इसका आदि बना रही थी। इस बात पर उसका अक्सर बैंकर पति से झगड़ा होने लगा। नौबत तलाक तक पहुंच गई। तीन माह की काउंसलिंग के बात उसने टिक-टॉक देखने कम किया।

केस-3 : 21 वर्षीय युवक को टिक-टॉक पर अपने मसल्स दिखाने का शौक लग गया। लाइक्स बढ़ाने के लिए वह रोज नए वीडियो अपलोड करने लगा। जब उसने साइट पर अपने से ज्यादा हैवी मसल्स वाले युवकों के वीडियो पर ज्यादा लाइक देखे तो वह तीन से चार घंटे जिम करने लगा। इस दौरान वह खुद को चोटिल कर बैठा। पेरेन्ट्स को जब इसका पता चला तो उन्होंने मनोचिकित्सक की मदद ली।