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Bhopal News : मास्टर प्लान का सच, 1200 कॉलोनियों में घुसा कारोबार

Bhopal Master Plan : करोड़ों संपत्तिकर वसूलने में विफल रहने के चलते मास्टर प्लान की गैर मौजूदगी में आवासीय क्षेत्र में व्यवसायिक गतिविधियों की अनुमति को सरकारी कमाई का जरिया बनाकर निगम का खजाना भरा।
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Bhopal Master Plan

Bhopal Master Plan (1200 कॉलोनियों में घुसा कारोबार Photo Source- Patrika)

Bhopal News :मध्य प्रदेश का भोपाल शहर अफसरों की नाकामी का दंश झेल रहा है। करोड़ों का संपत्तिकर वसूलने में विफल रहने के चलते मास्टर प्लान की गैर मौजूदगी में आवासीय क्षेत्र में व्यवसायिक गतिविधियों की अनुमति को सरकारी कमाई का जरिया बनाकर निगम का खजाना भरा। इस तिकड़म ने शहर को न ऊंचाई में विकसित होने दिया और न हॉरिजोंटल बढ़ने दिया। घर, दुकान और कार्यालय वॉकिंग डिस्टेंस पर करने की बात तो हुई, लेकिन घरों को ही दुकान बनाने की अनुमति दे दी। यही वजह है कि 1200 कॉलोनियों में कारोबार घुस गया और लोगों की जिंदगी नर्क हो गई।

ऐसे समझें स्थिति

1997 में लाए 2005 के मास्टर प्लान में बेस एफएआर यानी क्षेत्रफल की तुलना में निर्माण कितना किया जाए ये सवा रखा। यदि 1000 वर्गफीट जगह है तो वहां 1225 वर्गफीट तक के निर्माण की स्थिति बनाई। 2007 में 2021 के लिए मास्टर प्लान बनाने की कवायद शुरू हुई तो शहर को वर्टिकल बढ़ाने 18 मीटर व इससे चौड़ी रोड किनारे एफएआर 3 करने की बात हुई। क्षेत्रफल से तीन गुना निर्माण होने से हाईराइज बिल्डिंग बनती और शहर की अतिरिक्त आबादी के साथ दुकानों को जगह मिलती। स्थिति ये हैं कि अब तक सवा एफएआर ही हैं। हाईराइज बिल्डिंग बनाना आसान नहीं है।

एफएआर को ही बना लिया धंधा

2012 में नए सिरे से मास्टर ह्रश्वलान ड्राफ्ट 2021 का काम शुरू हुआ। कारोबार के लिए नई कमर्शियल स्पेस विकसित करने अतिरिक्त एफएआर देकर आवासीय क्षेत्र में कुछ विशेष जगह तय करने की बात हुई थी। टीएंडसीपी के तत्कालीन अफसरों ने अतिरिक्त व्यावसायिक क्षेत्र विकसित करने एफएआर का उपयोग करने की बजाय इसकी खरीदी बिक्री के प्रावधान कर दिए। राजस्व के लालच

राजस्व के लालच में भूमि उपयोग नहीं देखा

अफसरों ने राजस्व के लालच में आवासीय में खुली दुकानों के व्यावसायिक लाइसेंस बनाए, व्यावसायिक दर से टैक्स की वसूली की। दुकानदार भी घर में दुकान खोलने के लालच में ये देते रहे। यदि व्यावसायिक लाइसेंस बनाने व व्यावसायिक दर से संपत्तिकर वसूली के लिए भू उपयोग की स्थिति देख लेते और नोटिस जारी करते तो आवासीय क्षेत्र की शांति भंग नहीं होती।