
Kargil Vijay Diwas - 26 जुलाई को कारगिल विजय दिवस पर मनाया जा रहा है। ऐसे में कारगिल में अपने प्राणों को न्यौछावर करनेवाले सैनिकों की यादें फिर ताजा हो गई है। इनमें एमपी के सागर जिले के भी सैनिक शामिल हैं। यहां के कारगिल शहीद कालीचरण तिवारी हमेशा के लिए अमर हो चुके हैं।
दुश्मन सेना द्वारा किए जा रहे हमले और बरसती गोलियों के बीच भी कालीचरण तिवारी राष्ट्ररक्षा के लिए अडिग रहे। यहां के लोगों की जुबान पर इस योद्धा के शौर्य की चर्चा न केवल कारगिल विजय दिवस बल्कि आम दिनों में भी रहती है। कारगिल विजय दिवस के साथ ही हर राष्ट्रीय पर्व पर लोग अमर शहीद कालीचरण को याद करते हैं। बड़ी संख्या में लोग सिविल लाइन पर कालीचरण तिराहे पर स्थापित उनके स्मारक पर फूल अर्पित करने पहुंचते हैं।
इतनी कम उम्र में भी वे अपने सीने पर हंसते—हंसते 12 गोलियां झेल गए- जवान कालीचरण तिवारी जब कारगिल में शहीद हुए तब वे महज 22 साल के थे। वे जम्मू के 12 आरआर में तैनात थे और पाकिस्तानी सेना की घुसपैठ का मुकाबला कर रहे थे। उनके दिलो-दिमाग में मातृभूमि के लिए न्यौछावर होने का ऐसा जज्बा था। इतनी कम उम्र में भी वे अपने सीने पर हंसते—हंसते 12 गोलियां झेल गए। वे मोर्चे पर डटे रहे और देश के लिए शहीद हो गए।
शहीद कालीचरण तिवारी का जन्म 28 सितम्बर 1976 को हुआ था। उनके भाई दुर्गाचरण बताते हैं कि कालीचरण बचपन से ही फौजी बनने का सपना देखते थे। उनके परिवार में 5 भाई और 2 बहन हैं। शहीद कालीचरण के सभी भाई बहन आज भी उन्हें बेहद मिस करते हैं।
Published on:
26 Jul 2023 10:10 am
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