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भोपाल.राजधानी समेत प्रदेश तमाम रहवासी कालोनियों और मल्टी बिल्डिंग में रहने वाले हजारों नागरिकों को मनमर्जी शुल्क देने से निजात मिल जाएगी। सरकार शहर की कॉलोनियां में रेसीडेंशियल वेलफेयर एसोसिएशन यानि आरडब्ल्यूए एक्ट के तहत प्रबंधन का काम करेगी। नगरीय प्रशासन ने इसकी पॉलिसी तैयार कर ली है। इसे मंजूरी के लिए कैबिनेट में भेज दिया गया है। उम्मीद की जा रही है कि मार्च में इसे मंजूरी मिल जाएगी। मंजूरी के बाद इसका नोटिफिकेशन होगा और ये लागू हो जाएगी। आरडब्ल्यूए और अन्य समितियों की सदस्यों से मनमानी वसूली पर पत्रिका ने सरकार का ध्यान आकर्षित करते हुए कई खबरें प्रकाशित की थीं।
समितियों को प्रापर्टी ट्रांसफर का अधिकार
अभी पांच से छह नियमों के तहत रहवासी समितियां पंजीबद्ध हैं। वह सभी आरडब्ल्यूए एक्ट के छाते में खुद ही आ जाएंगी। एसडीएम कार्यालय में पंजीयन होगा और निगम इनमें मदद करेगा। सोसायटी में पानी से लेकर सीवर, सड़क, पार्क प्रबंधन, स्ट्रीट लाइट जैसे काम नगर निगम की निगरानी व सहयोग से रहवासी समितियां करेंगी। ये समितियां सरकारी मान्यता प्राप्त होंगी, जिससे इन्हें प्रॉपर्टी ट्रांसफर फीस लेने का अधिकार दिया जाएगा साथ राज्य सरकार इन्हें वित्तीय मदद करेगी।
रहवासी फ्रेंडली माहौल बनेगा
रहवासी समितियों को एक ही नियम के तहत लाने और कॉलोनी की व्यवस्था में निगम व शासन की मदद से जुड़े एक्ट के लागू होने के बाद रहवासियों की दिक्कतें काफी कम हो जाएंगी। कॉलोनियों के अंदर प्रबंधन के साथ डेवलपर के निर्माण का रखरखाव करने के लिए समितियां जरूरी हैं। रहवासियों की शिकायत निवारण प्रभावी होगा साथ ही नए नियमों में रहवासी फ्रेंडली माहौल बनेगा।
अभी लागू हैं कई प्रावधान
मप्र को-ऑपरेटिव सोसायटी एक्ट 1960
मप्र प्रकोष्ठ स्वामित्व अधिनियम 2000
मप्र म्यूनिसिपल कारपोरेशन एक्ट 1956
मप्र म्यूनिसिपलीटीज एक्ट 1961
मप्र रेरा एक्ट 2017
नए नियम से ये होगा
सभी सोसायटी आरडब्ल्यू के अंतर्गत आ जाएंगं
एसडीओ में पंजीयन से संबंधित निकाय में पंजीबद्ध हो जाएंगी
रहवासी समितियां खुद के बायलॉज बना सकेंगी
खुली या नॉन गेटेड सोसायटी 100 घर, 150 घर या 200 घरों को मिलाकर बनाई जा सकेंगी। सेक्टर वाइज भी समिति बनेगी। एरिया आधारित भी होंगी
रहवासी समिति एक अधिकारी वेतन पर रखेगी
संपत्ति बेचने के लिए समिति की एनओसी जरूरी होगी
रहवासी समिति शासन से वित्तीय मदद ले सकेगी
रहवासी समिति मास्टर प्लान में भी भागीदार बनेगी
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ये रहेंगे काम
कैंपस में कचरा प्रबंधन करना
ड्रेन व ड्रेनेज का प्रबंधन
स्ट्रीट लाइट का रखरखाव
पार्क और बाउंड्री वॉल का रखरखाव
परिसर में सड़क बनाना, रखरखाव व पुनरूद्धार का काम
परिसर का सौंदर्यीकरण
सुरक्षा का इंतजाम करना
सोसायटी में पार्किंग की व्यवस्था करना
सोसायटी के अंदर अन्य काम करना
वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम को विकसित करना
सोसायटी मे अग्रि सुरक्षा के इंतजाम
नगरीय प्रशासन इनके लिए प्रशिक्षण कार्यक्रम करेगा
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आरएडब्ल्यू पॉलिसी मंजूरी के लिए कैबिनेट को भेज दी गयी है। यहां से जल्द मंजूरी की उम्मीद है, इसके बाद सभी सोसायटी एक ही नियम के तहत काम करेंगी। रहवासियों की दिक्कतें दूर होंगी।
- भरत यादव, आयुक्त, शहरी आवास एवं विकास
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रहवासी समितियों को मदद करेगा नगरीय निकाय करेगा
नए एक्ट के लागू होने के बाद नगरीय निकाय अपने अधिकृत वेब पोर्टल पर समितियों को जगह देगा और यहां के चुनाव समेत अन्य गतिविधियां नजर आएंगी। यही नहीं नगर पालिक निगम अधिनियम 1956 की धारा 37 के तहत महापौर, अध्यक्ष को शामिल करते हुए अर्बन लोकल प्लानिंग एंड पुवर्टी एलेविएशन डिपार्टमेंट के नाम से नोडल एजेंसी बनेगी तो रहवासी समिति को स्थानीय योजना जैसे सीवेज, पानी, कचरा प्रबंधन, स्ट्रीट लाइट जैसी योजनाओं में भागीदारी बनाएगी।
यह फायदा भी होगा
निगम के हर जोन में शिकायत निवारण समिति बनेगी जो रहवासी समिति से सामंजस्य बनाकर काम करेगी। रहवासी समिति को राजस्व की व्यवस्था के लिए संपत्ति स्थानांतरण शुल्क का हिस्सा दिया जाएगा, ताकि वह कॉलोनी के अंदर रखरखाव कर सके। नगरीय निकाय की संपत्तियों का रखरखाव भी करेगी।
Published on:
14 Feb 2023 05:54 pm
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